चुनावी एफिडेविट , मुद्दों का डेथ सर्टिफिकेट

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चुनावी एफिडेविट , मुद्दों का डेथ सर्टिफिकेट

इंजी० अनुराग पाण्डेय
राजधानी न्यूज मध्य प्रदेश /छत्तीसगढ़

लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी द्वारा दिए गए एफिडेविट में दिखाई गई आर्थिक समृद्धि मोदी सरकार की संकल्प सिद्धि बन गई है. महंगाई, बेरोजगारी, चरमराती अर्थव्यवस्था के आरोपों को राहुल गांधी की आर्थिक समृद्धि ने ही गलत साबित कर दिया है. यही नहीं कांग्रेस के चुनावी नारे ‘ मेरे विकास का हिसाब दो’ का जवाब भी शपथ में दर्ज़ राहुल गांधी के आर्थिक विकास ने दे दिया है.
एफिडेविट के मुताबिक़ राहुल गांधी की संपत्ति पांच सालों में 5.54 करोड़ रुपए बढ़ी है. यह उनकी संपत्ति मुख्यतः शेयर बाज़ार और म्युचुअल फंड से बढ़ी है. राहुल गांधी ने 26 भारतीय कंपनियों के शेयर में पूंजी निवेश किया. इन कंपनियों में पिछले पांच सालों में हुई ग्रोथ के कारण राहुल गांधी की आमदनी में पांच सालों में तकरीबन 33 परसेंट का इजाफा हुआ है. म्युचुअल फंड में भी उनके निवेश पर शानदार ग्रोथ आई है.
मोदी सरकार लगातार यही कहती रही कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है. भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में 11 नंबर पर थी जो पांचवें नंबर पर आ गई है. मोदी सरकार का तो यह भी वादा है कि सरकार के अगले टर्म में भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था होगी. राहुल गांधी कांग्रेस और विपक्षी दलों ने कभी भी अर्थव्यवस्था में सुधार के मोदी सरकार के दावे को स्वीकार नहीं किया.
आरोप लगाया जाता रहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण भारत में गरीबी-अमीरी में अंतर बढ़ रहा है. कुछ खास उद्योगपतियों को सरकार देश के सारे संसाधन सौंपती जा रही है. कोई भी सार्वजनिक सभा हो राहुल गांधी ने सरकार की आर्थिक नीतियों और कुछ औद्योगिक घरानों के साथ उनके नेक्सस पर हमेशा हमला किया है.
राहुल गांधी के शपथ पत्र से जो तथ्य सामने आए हैं उससे तो यही साबित होता है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और भारत के अर्थ जगत में पॉजिटिव परिस्थितियों का लाभ राहुल गांधी ने भी जमकर उठाया है. राहुल गांधी के ग्रोथ के प्रतिशत की अगर तुलना की जाए तो यह देश के सालाना विकास दर से भी ज्यादा है. अडानी और अंबानी की ग्रोथ रेट भी राहुल गांधी की संपत्ति में ग्रोथ से बहुत आगे नहीं दिखाई पड़ेगी.
शेयर और म्युचुअल फंड का मार्केट सबसे अस्थिर मार्केट होता है. आम आदमी तो शेयर मार्केट और म्युचुअल फंड में निवेश से भी कतराता है. इन सेक्टर को लेकर निवेशकों के मन में हमेशा यह आशंका बनी रहती है कि सरकार की नीतियों और बाज़ार में अस्थिरता के कारण कभी भी उनकी पूंजी डूब सकती है. राहुल गांधी भारत के शेयर मार्केट और म्युचुअल फंड मार्केट पर अपनी संपत्ति का बहुत बड़ा हिस्सा निवेश किए हुए हैं.
राहुल गांधी अपनी इस ग्रोथ के लिए कम से कम सरकार की पॉजिटिव नीतियों को श्रेय दे सकते हैं. नरेंद्र मोदी उनके पॉलिटिकल विरोधी हैं लेकिन भारत का विकास और उनकी स्वयं की समृद्धि अगर मोदी सरकार की नीतियों के कारण तेज हुई है तो फिर यह तो उनको राजनीतिक तौर पर स्वीकार ही करना पड़ेगा.
शेयर और म्युचुअल फंड मार्केट किसी भी देश की विकास दर का सूचक होता है. शेयर में उछाल विकास के पैमाने के रूप में पूरी दुनिया में स्वीकार किया जाता है. जिस उछाल के कारण राहुल गांधी की शेयर वैल्यू बढ़ी है, वह उछाल मोदी सरकार की स्थिरता और नीतियों का ही परिणाम माना जाएगा. राहुल गांधी का शपथ पत्र ही कांग्रेस और विपक्षी दलों के मुद्दों का डेथ सर्टिफिकेट बन गया है.
राहुल गांधी का शपथ पत्र सोशल मीडिया के माध्यम से हर हाथ तक पहुंच जाएगा. अभी तक तो राहुल गांधी मोदी सरकार की नीतियों और आर्थिक एजेंडे को आरोपित कर रहे थे लेकिन अब जब स्वयं उन्होंने उन्हीं नीतियों का फायदा उठाया है तब अब उनके आरोप उनके खिलाफ ही उपयोग हो जाएंगे.

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