पाली में ‘निष्कासित नेतृत्व’ की वापसी, भाजपा की अनुशासन नीति पर सवाल

पाली/उमरिया। आकाश नामदेव। पाली नगर में भाजपा की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2021 में अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा 6 वर्ष के लिए निष्कासित किए गए स्थानीय नेता की पुनः सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
निष्कासन अवधि अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति को भाजपा के कई स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सेदारी करते हुए और मंच पर प्रमुख स्थान लेते देखा जा रहा है। इससे राजनीतिक कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या पार्टी का अनुशासन केवल कागज़ों में लागू होता है या व्यवहार में भी।
वर्ष 2021 में यह व्यक्ति भाजपा मंडल अध्यक्ष के पद पर थे और उस समय स्थानीय विधायक मंत्री पद पर कार्यरत थीं। उस अवधि में नगर में इनके व्यवहार और कार्यशैली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। अधिकारियों पर दबाव, अवैध वसूली, अनौपचारिक प्रभाव और दखलअंदाज़ी जैसे मामलों ने नगर में असंतोष पैदा कर दिया था। इन्हीं परिस्थितियों में 5 जनवरी 2021 को प्रदेश नेतृत्व द्वारा इन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था।
अब नगर में चर्चाएं तेज हैं कि निष्कासन के बावजूद यदि वही स्थिति वापस दिखाई देने लगे, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे इनकी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे नगर में फिर से शिकायतों और असंतोष की आवाज़ें उठती नज़र आ रही हैं। लोगों का कहना है कि इनकी सक्रियता के साथ-साथ पुराना व्यवहार भी लौटता दिख रहा है और कई नागरिकों ने फिर से दबाव एवं हस्तक्षेप की शिकायतें जतानी शुरू कर दी हैं।
स्थिति यह भी बताई जा रही है कि यदि जल्द इस पर पार्टी स्तर पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर न केवल भाजपा की छवि पर पड़ेगा बल्कि वर्षों से संगठन में जुड़े वरिष्ठ एवं जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में असंतोष भी पैदा हो सकता है। कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि निष्कासन के बाद भी यदि व्यवहार और भूमिका में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, तो यह संदेश जाएगा कि पार्टी में अनुशासन से ज्यादा संपर्क और पहुंच महत्वपूर्ण है।
नगर में इस मुद्दे पर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह निष्कासन केवल एक औपचारिक कार्रवाई थी या अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा नेतृत्व इस मामले पर फिर कोई निर्णय लेगा या यह प्रकरण समय के साथ निर्बाध चलता रहेगा।








