धारा 40 से बचने की साज़िश

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जलोदिया पंथ के सरपंच पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, जनपद अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में

देपालपुर।संदीप सेन। लाखों रुपये के कथित भ्रष्टाचार में घिरे ग्राम पंचायत जलोदिया पंथ के सरपंच बलदेव पटेल पर लगे आरोप लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, सरपंच बलदेव पटेल जनपद पंचायत के कुछ कर्मचारियों व अधिकारियों को कथित रूप से आर्थिक लाभ पहुंचाकर अपने विरुद्ध प्रस्तावित धारा 40 (मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम) की कार्यवाही से बचने का प्रयास कर रहा है। आरोप है कि जांचों में अनियमितताएं स्पष्ट होने के बावजूद जानबूझकर कार्रवाई को कमजोर किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्देश जारी होने के बाद भी देपालपुर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुसुम मंडलोई, लेखाधिकारी जितेंद्र शर्मा, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी गौरव निगम एवं सहायक यंत्री दर्पण कनोजिया द्वारा कथित रूप से सरपंच को संरक्षण दिया जा रहा है। वरिष्ठ कार्यालयों को लगातार भ्रामक प्रतिवेदन, अपूर्ण तथ्यों और कथित रूप से झूठे फोटोग्राफ भेजकर गुमराह करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

गांव की हालत भयावह, जनस्वास्थ्य पर संकट

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत जलोदिया पंथ में गंदगी, जलभराव, खुले में मृत पशुओं का पड़े रहना आम हो गया है। बीते समय में डेंगू का प्रकोप फैल चुका है, जिसमें एक गर्भवती महिला की मृत्यु का मामला भी सामने आया था। इसके बावजूद पंचायत स्तर पर ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। वर्तमान में रहवासी इलाकों में जमा पानी से तेज बदबू, मच्छरों का प्रकोप और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आशंका जताई है कि वहां गंदे पानी की शिकायतों की अनदेखी के चलते 17 लोगों की जान चली गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते नहीं जागा, तो जलोदिया पंथ में भी वैसी ही स्थिति बन सकती है।

जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष सबूत पेश करने की तैयारी

लगातार अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने घोषणा की है कि वे मंगलवार को बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर शिवम वर्मा को गांव की भयावह स्थिति से अवगत कराएंगे और अधिकारियों की लापरवाही से जुड़े दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि सरपंच बलदेव पटेल पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई हो।

दस्तावेज गायब होने के आरोप, भीतरखाने तनाव

मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब सूत्रों से जानकारी सामने आई कि जलोदिया पंथ जांच से जुड़े कुछ अतिआवश्यक दस्तावेज कथित रूप से गायब किए गए हैं। आरोप है कि यह सब पैसों के लेन-देन के जरिए सरपंच को धारा 40 की कार्रवाई से बचाने की मंशा से किया गया। इसी को लेकर गत रात्रि जनपद सीईओ कुसुम मंडलोई और अधिकारियों के बीच तीखी नोक-झोंक की चर्चा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि सीईओ ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।

प्रशासन की भूमिका पर बड़े सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं कि जब लगातार शिकायतें, जांच रिपोर्ट और जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर तथ्य सामने हैं, तो वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या भगीरथपुरा जैसे हालात बनने का इंतजार कर रहा है? अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इतने गंभीर आरोपों और घटनाक्रम के बाद प्रशासन व वरिष्ठ अधिकारी ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर मामला फाइलों और प्रतिवेदनों में दबकर रह जाता है।