नगर के गरीबों पर इंजीनियर गुप्ता का प्रहार

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बिना लेन-देन के जारी नहीं हो रही आवासों की किस्तें

उमरिया। रामकृपाल विश्वकर्मा। उमरिया जिले के में नगर परिषद उमरिया का मामला है की ग़रीबी एक ऐसा श्राप है, जो न तो समाज में रहना दे रहा और न ही परिवार को जीने देता है, बाबजूद इसके किसी तरह से वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता आ रहा है, गरीबों का जीवन स्तर सुधारने प्रयास हुए इसी प्रयास के तहत पीएम आवास योजना को लागू किया गया मगर बीते दो साल से नगरीय क्षेत्र में आवासों की स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है, गरीब भी क्या करें जब तक गुप्ता जी का आवास नहीं भरता तब तक उसकी किस्तें नहीं आती हैं। हालात यह है कि नगर पालिका क्षेत्र में पूर्ण हो चुके आवासों की अंतिम किस्त के लिए हर रोज नगर पालिका के चक्कर हितग्राही काट रहे हैं, वहीं जो आवास अधूरे हैं उन्हें एक लंबे समय से दूसरी किस्त का इंतजार है।

एक इंजीनियर के भरोसे दो नगर पालिका
जानकारी है कि नगर पालिका उमरिया में पदस्थ इंजीनियर के कंधों पर इतना बोझ बढ़ गया है कि वह काम ही नहीं कर पा रहे हैं, नगर पालिका परिषद उमरिया का काम खत्म नहीं होता और उन्हें चंदिया नगर परिषद का काम भी सौंप दिया गया है, हालांकि जिला मुख्यालय में ऐसे भी अधिकारी हैं जिन्हें 10 विभागों की कमान सौंपी गई है और यहां गुप्ता जी हैं कि दो विभाग भी नहीं संभाल पा रहे हैं। बताया जाता है कि आवास योजना पर गुप्ता जी ने एक अलग ही रेट लिस्ट बना रखी है, जो कि समय समय पर निकाली जाती है और प्रति किस्त के हिसाब से प्रतिशत में हितग्राहियों से बात होती है।‌

*चुनाव और आचार संहिता का बहाना लागू*
बताया जाता है कि बीते एक वर्ष से पीएम आवास पाने वाले हितग्राही भटक रहे हैं, उन्हें कभी फाइल कलेक्टर के पास है का बहाना बता दिया जाता है तो कभी डीपीआर तैयार नहीं हुई कहकर भगा दिया जाता है। इस बात की बानगी है आय दिन होने वाली शिकायतें, जो यह बता रहीं हैं कि किस प्रकार से अपना प्रतिशत सेट करने के लिए नियम को बड़ी ही बारीकी से बताया जाता है। विधानसभा चुनाव और फिर यह लोक सभा चुनाव की आचार संहिता भले ही खत्म होने को हैं मगर नगर पालिका का यह धारा अनवरत जारी है जो समझ से परे है।

तीन साल में भी नहीं मिली दूसरी किस्त
नगर पालिका उमरिया क्षेत्र में आने वाले तमाम वार्डों में स्वीकृत पीएम आवासों में सैकड़ों ऐसे भी आवास हैं जिनकी दूसरी और तीसरी किस्त नहीं मिली हैं। तीन सालों में न तो डीपीआर तैयार हो पाई है और न ही कलेक्टर कार्यालय से फाइल नगर पालिका पहुंच सकी है। बहरहाल जो भी हो एक तरफ सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को लाभ पहुंचाने प्रयासरत हैं वहीं नगर पालिका उमरिया के इंजीनियर साहब सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम बड़ी ही तेजी के साथ करते आ रहे हैं।

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