
जैतहरी (अनूपपुर): राजनीति में जब जनसेवा की जगह ‘करोड़ों के खर्च’ का अहंकार ले लेता है, तो जनता के साथ कैसा व्यवहार होता है, इसकी बानगी जैतहरी में देखने को मिली। यहाँ नगर परिषद अध्यक्ष उमंग अनिल गुप्ता पर एक आम नागरिक के साथ अभद्रता और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला एक मासूम बच्चे के पेशाब करने जैसी मामूली बात से शुरू हुआ, जो अध्यक्ष महोदय की ‘शान’ में गुस्ताखी बन गया।
10 करोड़ का ‘हिसाब’ और जनता पर प्रहार
घटना 31 दिसंबर की है। वार्ड क्रमांक 13 निवासी देवसाय राठौर अपने बच्चों के साथ नाई की दुकान पर थे। जब एक बच्चे ने पास के चबूतरे पर पेशाब किया, तो नगर सरकार के मुखिया उमंग गुप्ता कथित तौर पर “10 करोड़ के विकास” का हिसाब लेकर वहां पहुँच गए। पीड़ित का आरोप है कि अध्यक्ष जी ने यह कहते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी कि “मैंने यहाँ 10 करोड़ खर्च किए हैं।”
यह वाकई एक विडंबना है कि लोकतंत्र में जनता के पैसे से हुए विकास को नेता अपनी जागीर समझने लगते हैं। पीड़ित गिड़गिड़ाता रहा, माफी मांगता रहा, लेकिन सत्ता के मद में चूर अध्यक्ष ने उसे मां-बहन की गालियां दीं और लातों से पीटकर ‘जनप्रतिनिधि’ होने का एक नया प्रमाण पेश किया।
कहाँ गया जनसेवक का धर्म?
जब आम आदमी को संकट में अपने प्रतिनिधि की याद आती है, तब वे अक्सर फोन नहीं उठाते। पीड़ित ने अपने पार्षद को फोन लगाया, लेकिन मदद नहीं मिली। अंततः न्याय की आस में पीड़ित ने थाने का दरवाजा खटखटाया है।
यह घटना राजनीति के उस चेहरे को उजागर करती है जहाँ जनता सिर्फ चुनाव तक ‘जनार्दन’ रहती है, और चुनाव के बाद नेताओं के लिए एक ‘वार्ड नंबर’ और ‘लात खाने वाला मोहरा’ मात्र रह जाती है।
क्या कानून अपना काम करेगा?
जैतहरी पुलिस को आवेदन दे दिया गया है, जिस पर पुलिसिया मुहर तो लग गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मुहर सत्ता के रसूख के आगे अपनी स्याही बरकरार रख पाएगी? क्या एक रसूखदार नेता पर उचित कार्रवाई होगी या इसे भी “राजनीतिक द्वेष” का नाम देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
क्षेत्र की जनता अब यह पूछ रही है कि विकास का मतलब चबूतरे चमकाना है या जनता का सम्मान सुरक्षित रखना।








