जंगल में गहराया जल संकट वन्यजीव परेशान

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रहवासी इलाके में आ रहे हैं जंगली जानवर

रायसेन। जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर बेगमगंज के घने जंगल में जल स्रोत सूखने के कारण वन्यजीवों की जान आपात में आ गई है। पानी की तलाश में भटकते सैकड़ों वन्यजीवों में हिरण, नील गाय , भेड़की , चीतल , चौसिंगा , तेंदुए , मोर , खरगोश एवं अन्य वन्यजीवों ने बड़ी संख्या में आसपास के गांव में आना शुरू कर दिया है ।

पानी के अभाव में गांव की और कूच कर रहे हैं वन्यजीवों के लिए जंगल में ही पानी की व्यवस्था करने की पहल करते हुए बेगमगंज रेंजर अरविंद अहिरवार बेजुबान जानवरों के मसीहा बनकर उभरे और बना डाले 12 जल स्रोत्र ।
अब जंगल में जंगली जानवरों के पानी पीने के लिए कुंड बनवाए जा रहे है। अभी तक 12 बने है।
जंगल में जल स्त्रोतों में पानी नहीं बचा है लेकिन आने वाले दिनों में समस्या और बढ़ने की आशंका के मद्देनजर पानी की व्यवस्था की जा रही है ।

वन्यजीवों को पानी की व्यवस्था करने के लिए शासन से समय पर राशि नहीं मिलती है । इस बीच जंगल के भीतर मौजूद पानी के स्त्रोतों सूखने लगे है।

रेंजर अरविंद अहिरवार ने बताया कि उनके द्वारा अभी पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
गत दिनों जब वह जंगल में गस्त कर रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि प्यास के कारण एक हिरण मिट्टी को चाट रहा था ।

वन अधिकारी को समझते देर नहीं लगी की जानवर के शरीर में पानी की कमी हो रही है और पानी नहीं मिलने से हिरण ऐसा कर रहा है ।
जंगल से लौटते ही उन्होंने अपने अधीनस्थ वनकर्मियों की आनंन-फानन में एक मीटिंग बुलाई और जंगल में पानी की व्यवस्था के लिए उन्होंने तुरंत आदेश जारी करते हुए व्यवस्था करने की तैयारियां शुरू कर दी और खुद मौके पर खड़े होकर एक दर्जन पानी के गड्ढे बनवाए ताकि कोई भी जंगली जानवर पानी की तलाश में गांव की तरफ ना आ पाए उसे अपनी जगह पर जंगल में पानी मिल सके ।
. भारतीय संविधान हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है यह बात आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन भारत के संविधान ने जानवरों को भी जीवन जीने की आजादी दी है। अगर इनके जीवन को बाधित करने का कोई प्रयास करता है तो इसके लिए संविधान में कई तरह के दंड़ के प्रावधान हैं। इतना ही नहीं इनमें से 10 जानवर ऐसे भी हैं जिनको मारने पर आपको जेल भी हो सकती है।

इन दिनों पारा 43 डिग्री सेल्सियस तापमान और तपती धूप के बीच इन बेजुबानों के लिए वन विभाग की ओर से जंगल में पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जंगल में पोखर सूख चुके हैं। ऐसे में जंगली जानवर पानी की तलाश में जंगल से बाहर आ रहे हैं।
वन विभाग की ओर से अभी तक वन्य जीव जंतुओं के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी । जिसकी वजह से जानवर गर्मी के मौसम में व्याकुल प्यासे भटक रहे हैं। जंगल में पानी न मिलने पर जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।
जंगल से जानवरों के बाहर निकलने पर शिकारियों की निगाहें भी उनकी ओर टिक गईं हैं।
भीषण गर्मी में जंगलों के जलस्रोत सूख जाने के कारण प्यासे जानवर शहर और गांवों की ओर आ रहे हैं। हिरण , चीतल,भेड़की , नील गाय , तेंदुए और अन्य जंगली जानवर आबादी में दस्तक दे रहे है।

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