टीआई की मनमानी या द्वेष भावना? पत्रकार के नाम दर्ज हुई FIR!
किसान आंदोलन की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार सचिन पटेल को बताया उपद्रवी, तत्कालीन टीआई अरविंद जैन पर गंभीर आरोप
पत्रकार का दावा—कवरेज से रोकने का दबाव बनाया, विरोध करने पर दी थी ‘निपटा देने’ की धमकी
अनूपपुर कोतवाली थाना का मामला, पीड़ित पत्रकार अब कोर्ट की शरण लेने की तैयारी में

अनूपपुर। जिला मुख्यालय में पत्रकारिता और पुलिस कार्रवाई को लेकर एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। किसान आंदोलन की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार सचिन पटेल के नाम एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्रकार का आरोप है कि तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद जैन द्वारा उनके साथ कथित रूप से मनमानी की गई और पत्रकारिता के कार्य में बाधा पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मामला उस समय का बताया जा रहा है, जब किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। पत्रकार सचिन पटेल अन्य पत्रकारों की तरह मौके पर पहुंचे और आंदोलन की कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस और पत्रकार के बीच विवाद की स्थिति निर्मित होने की बात सामने आई। आरोप है कि पुलिस ने पत्रकार को आंदोलन की कवरेज करने से रोकने का प्रयास किया और उन्हें आंदोलनकारियों के साथ उपद्रवी के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कवरेज करने पहुंचे थे, FIR में बना दिया आरोपी!
पत्रकार सचिन पटेल का कहना है कि वह मौके पर केवल अपना पत्रकारिता का दायित्व निभाने पहुंचे थे। उनका उद्देश्य किसान आंदोलन की वास्तविक स्थिति को सामने लाना था। लेकिन घटनाक्रम इस कदर बदला कि जिस पत्रकार को आंदोलन की खबर जनता तक पहुंचानी थी, उसी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो गई।
पत्रकार का आरोप है कि तत्कालीन टीआई अरविंद जैन द्वारा उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया तथा दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उन्हें ‘निपटा देने’ तक की धमकी दी गई थी।
‘उपद्रवी’ बताने पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई पत्रकार किसी आंदोलन की कवरेज करने पहुंचता है तो क्या उसे आंदोलनकारी या उपद्रवी मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है?
पत्रकार का कहना है कि वह मौके पर समाचार संकलन के लिए मौजूद थे। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की परिस्थितियों और उसमें लगाए गए आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
क्या पत्रकारिता करना पड़ा भारी?
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और पत्रकारों के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों का काम घटनाओं को जनता तक पहुंचाना है। यदि किसी पत्रकार पर कानून-व्यवस्था भंग करने या किसी अन्य अपराध का आरोप है तो नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है, लेकिन कार्रवाई की परिस्थितियों और तथ्यों को लेकर पारदर्शिता भी जरूरी है।
सचिन पटेल का आरोप है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि कथित रूप से व्यक्तिगत द्वेष या दबाव का परिणाम थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब कोर्ट की शरण में जाएंगे पत्रकार
मामले को लेकर पीड़ित पत्रकार ने अब न्यायालय की शरण लेने की बात कही है। उनका कहना है कि वह पूरे मामले के दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और यह स्पष्ट कराने का प्रयास करेंगे कि आखिर किसान आंदोलन की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को किस आधार पर उपद्रवी बताया गया और उसके खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई।








