पॉक्सो एक्ट के फरार आरोपी को बिजुरी पुलिस ने किया गिरफ्तार, जेल भेजने के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर उठे गंभीर सवाल
कानून के शिकंजे से बचने के लिए साढ़े तीन साल तक चूहे-बिल्ली का खेल खेलने वाले अपराधी जब आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ते हैं, तो न्याय प्रणाली से निष्पक्षता की उम्मीद जगती है। अनूपपुर जिले के बिजुरी थाना क्षेत्र से पॉक्सो एक्ट और अन्य संगीन धाराओं में फरार चल रहे आरोपी राजेश द्विवेदी की 5 अक्टूबर 2026 को हुई गिरफ्तारी भी ऐसी ही एक उपलब्धि होनी चाहिए थी। लेकिन जैसे ही आरोपी को न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया, वैसे ही अचानक उपजी उसकी “रहस्यमयी बीमारी” और जिला चिकित्सालय में भर्ती होने के घटनाक्रम ने पूरी पुलिस प्रशासन और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह कानून के शिकंजे से बचने और जेल की सलाखों को मात देने का एक नया और आजमाया हुआ पैंतरा है? पीड़िता और शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि सालों तक पुलिस को चकमा देने वाला आरोपी अब मेडिकल ग्राउंड का सहारा लेकर सजा से बचने की कोशिश कर रहा है। अदालत द्वारा जेल भेजे जाने के तुरंत बाद आरोपी का अस्पताल में आराम फरमाना न सिर्फ पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि क्या रसूख और सांठगांठ के बल पर जेल की दीवारों को अस्पताल के वातानुकूलित कमरों में तब्दील किया जा रहा है?
वर्ष 2023 से पुलिस को चकमा दे रहा था आरोपी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनूपपुर जिले के बिजुरी थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य गंभीर आरोपों में संलिप्त आरोपी राजेश द्विवेदी पुत्र उमाकांत द्विवेदी (निवासी कपिलधारा कॉलोनी, बिजुरी) वर्ष 2023 से लगातार फरार चल रहा था। पुलिस की कई टीमों द्वारा लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी। आखिरकार 5 अक्टूबर 2026 को बिजुरी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
14 अप्रैल 2023 को दर्ज हुई थी गंभीर धाराओं में शिकायत
मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो घटना 14 अप्रैल 2023 की है। बिजुरी थाना क्षेत्र की कपिलधारा कॉलोनी निवासी पीड़िता और उसके परिजनों ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, घटना वाले दिन शाम करीब 7:30 बजे नाबालिग लड़की अपने परिजनों के साथ घर के पास टहलने गई थी। इसी दौरान आरोपी प्रीतम सेन और उसका साथी राजेश द्विवेदी वहां पहुंचे और कथित रूप से नाबालिग का हाथ पकड़कर उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर आरोपियों द्वारा गाली-गलौज और मारपीट भी की गई।
नाबालिग और उसके परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं, पॉक्सो एक्ट तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। घटना के बाद से ही आरोपी प्रीतम सेन और राजेश द्विवेदी फरार हो गए थे और पुलिस लगातार उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी।
जेल जाते ही अस्पताल में भर्ती होने पर उठे सवाल
साढ़े तीन साल की लंबी फरारी के बाद जब 5 अक्टूबर 2026 को राजेश द्विवेदी की गिरफ्तारी हुई और अदालत ने उसे जेल भेजा, तो इसके तुरंत बाद एक नया घटनाक्रम सामने आया। आरोपी को जेल से जिला चिकित्सालय अनूपपुर में उपचार के लिए भर्ती करा दिया गया। जेल की सलाखों के पीछे रहने के बजाय आरोपी का अस्पताल में भर्ती होना फरियादी पक्ष के लिए गले नहीं उतर रहा है। फरियादी पक्ष ने आरोपी के मेडिकल ग्राउंड और अस्पताल में भर्ती कराए जाने की परिस्थितियों पर कड़े सवाल उठाए हैं।
पूर्व में भी दर्ज हैं कई गंभीर अपराध
हालांकि, आरोपी की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल में भर्ती किए जाने के कारणों की अब तक कोई स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। सूत्रों और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी राजेश द्विवेदी के विरुद्ध पूर्व में भी कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। फरियादी पक्ष ने मामले में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि आरोपी को किसी भी तरह की अनुचित राहत न मिल सके और पीड़िता को सच्चा न्याय मिल सके।







