भ्रष्टाचार का खेल और नौनिहालों के भविष्य पर प्रहार
अनूपपुर खेल विभाग में महा-विस्फोट:
18 लाख का कोई हिसाब नहीं, जांच रिपोर्ट में वित्तीय महाघोटाला उजागर!
नौनिहालों के हक पर डाका!
अनूपपुर खेल विभाग में लाखों की ‘लूट’, जांच में फंसा जिला क्रीड़ा अधिकारी।
कागजों पर खेले गए ‘खेल’: अनूपपुर खेल विभाग में लाखों के वाउचर्स गायब, भ्रष्टाचार की पुष्टि।
अनूपपुर। प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य अनूपपुर जिले से सरकारी तंत्र को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले खेल विभाग में लंबे समय से चल रहे संस्थागत भ्रष्टाचार, भारी वित्तीय अनियमितताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की खुलेआम अवहेलना का एक बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। सरकार जहाँ एक ओर आदिवासी अंचल के प्रतिभावान और गरीब खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस बजट को अपनी निजी जागीर समझकर लूटने में मग्न थे। एक उच्च स्तरीय जांच समिति द्वारा तैयार की गई प्रतिवेदन रिपोर्ट ने विभाग के भीतर मचे इस हड़कंप और ‘कमीशनखोरी’ के काले चेहरे को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है, जिसके बाद अब दोषी अधिकारियों पर कानून का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और विशेष जांच समिति का गठन
इस पूरे खेल घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग अनूपपुर के आदेश क्रमांक 1025367/2026/अनूपपुर दिनांक 19.05.2026 के तहत एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया। विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, चहेतों को लाभ पहुंचाने और वित्तीय हेराफेरी की लगातार मिल रही शिकायतों को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया। इसके बाद प्रशासन द्वारा एक विशेष उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसे अमलाई कालरी के माध्यमिक शिक्षक और जिला क्रीड़ा अधिकारी शेख खलील कुरैशी के खिलाफ खेल विभाग में हुई तमाम वित्तीय गड़बड़ियों और आदेशों की अवहेलना के संगीन आरोपों की जांच सौंपकर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
आरोपी अधिकारी की टालमटोल और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया
प्रशासनिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों का पालन करते हुए कार्यालयीन पत्र क्रमांक 967 जैतहरी दिनांक 22/05/2026 के माध्यम से आरोपी अधिकारी शेख खलील कुरैशी को समन जारी किया गया था। उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे दिनांक 29/05/2026 को जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना अभिमत और बयान दर्ज कराएं। हालांकि, प्रशासनिक ढिठाई का परिचय देते हुए वह निश्चित तिथि पर किन्हीं कारणों का हवाला देकर उपस्थित नहीं हुए। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए समिति ने उन्हें दोबारा कड़ा नोटिस जारी कर 01.06.2026 को हाजिर होने का अंतिम अवसर दिया, जिसके बाद कार्रवाई के डर से वे आखिरकार समिति के सामने पेश हुए।
चार वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड्स और वाउचर्स की मांग
जांच समिति ने इस पूरे महाघोटाले की जड़ तक जाने के लिए विकास खंड शिक्षा अधिकारी जैतहरी के कार्यालय में आरोपी क्रीड़ा अधिकारी को तलब किया था। यहाँ समिति के सदस्यों ने उन्हें कड़े निर्देश दिए कि वे वर्ष 2021 से लेकर अब तक विभाग को प्राप्त हुई तमाम सरकारी राशियों, उनके समायोजन से जुड़े सभी मूल देयकों और वाउचर्स की सत्यापित प्रतियां अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। प्रशासन इस बात को सुनिश्चित करना चाहता था कि बच्चों की खेल कूद गतिविधियों, खेल सामग्री और खेल अकादमियों के नाम पर आवंटित की गई लाखों रुपये की सरकारी राशि का सही उपयोग हुआ है या उसे कागजों पर ही ठिकाने लगा दिया गया है।
लाखों के सरकारी खजाने का गबन और वाउचर्स गायब
जब आरोपी अधिकारी शेख खलील कुरैशी ने जांच समिति के समक्ष अपना बिंदुवार लिखित अभिकथन प्रस्तुत किया, तो उसमें दर्ज आंकड़ों ने खेल विभाग में चल रही खुली लूट की पोल खोल कर रख दी। उनके द्वारा दिए गए लिखित बयान के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच खेल विभाग को कुल 28,76,000 (अट्ठाइस लाख छिहत्तर हजार रुपये) की भारी-भरकम राशि प्राप्त हुई थी। बेहद हैरतअंगेज और चौंकाने वाले रूप से, इस बड़ी राशि में से केवल 10,29,553 रुपये के वाउचर्स ही दिनांक 04.11.2025 को सहायक आयुक्त कार्यालय में जमा कराए गए थे। शेष बची हुई लगभग 18 लाख से अधिक की एक बड़ी राशि का वाउचर आज दिनांक तक विभाग के पास जमा ही नहीं किया गया है, जो सीधे तौर पर वित्तीय गबन की ओर इशारा करता है।
भाई-भतीजावाद और बेटे को नियमों के विपरीत उपकृत करने का खेल
इस खेल विभाग में न केवल पैसों की हेराफेरी की गई, बल्कि भाई-भतीजावाद और अपात्रों को उपकृत करने का भी घिनौना खेल खेला गया। शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि जिला क्रीड़ा अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पुत्र ‘शेख कौनेन कुरैशी’ को अनुचित और अवैध लाभ पहुंचाया। इस गंभीर आरोप पर सफाई देते हुए उन्होंने लिखित में दलील दी कि उनके पुत्र ने 10वीं तक की पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड से की है और तत्कालीन सत्र 2011-12 के नियमों के अनुसार किसी भी बोर्ड के छात्र मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते थे। हालांकि, अपनी इस दलील के समर्थन में वे समिति के समक्ष कोई भी वैध शासकीय आदेश या नियम पुस्तिका प्रस्तुत नहीं कर सके।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बड़ा फर्जीवाड़ा और पहचान का संकट
मामले में सबसे चौंकाने वाला और खेल भावना को ठेस पहुंचाने वाला मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी जितेंद्र यादव को लेकर दर्ज शिकायत पर जांच हुई। आरोप है कि उक्त बालक किसी अन्य योग्य खिलाड़ी के स्थान पर फर्जी तरीके से राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में सम्मिलित हुआ था। इस गंभीर जालसाजी पर जिला क्रीड़ा अधिकारी ने अपना पल्ला झाड़ते हुए सारा दोष तकनीकी व्यवस्था पर मढ़ दिया कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पास खिलाड़ियों के दस्तावेज जैसे फोटो, आधार और जन्म प्रमाण पत्र एडवांस में अपलोड होते हैं और वहां बायोमेट्रिक जांच के बाद ही खेलने की अनुमति मिलती है। हालांकि, उन्होंने यह कड़वा सच स्वीकार किया कि रिकॉर्ड में संलग्न फोटो और खिलाड़ी के नाम का मिलान नहीं हो रहा है, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
अंतिम अभिमत और जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगामी सख्त कार्रवाई
इसके अतिरिक्त, आयु वर्ग की पात्रता को दरकिनार कर मानसी सिंह नामक छात्रा को अंडर-14 और अंडर-19 दोनों आयु वर्गों की प्रतियोगिताओं में शामिल करने का भी गंभीर मामला सामने आया। बहरहाल, आरोपी अधिकारी की तमाम लचर दलीलों और बहानों के बावजूद जांच समिति के सदस्यों प्राचार्य मुलायम सिंह परिहार, प्राचार्य हर प्रसाद तिवारी और विकास खंड शिक्षा अधिकारी एस.के. श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से अपने अंतिम अभिमत में यह स्पष्ट कर दिया है कि लाखों रुपये के वाउचर्स का समय पर जमा न होना सीधे तौर पर गंभीर वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में आता है।
इस जांच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अब अनूपपुर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन अब इस भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी में है। आगामी कार्रवाई के तहत दोषी अधिकारी शेख खलील कुरैशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। इसके साथ ही, सरकारी धन के दुरुपयोग और राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ी के दस्तावेजों में हेराफेरी करने के आरोप में उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। प्रशासन गायब पायी गई 18 लाख से अधिक की राशि की वसूली दोषी अधिकारी के वेतन और संपत्ति से करने के आदेश जारी करने जा रहा है, ताकि शासकीय धन की क्षतिपूर्ति की जा सके और व्यवस्था में बैठे अन्य भ्रष्ट अधिकारियों को एक कड़ा संदेश दिया जा सके।






