जनभावनाओं को दरकिनार कर खोली गई शराब दुकान; ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

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पं अजय मिश्र
​अनूपपुर।  की मूक सहमति और ‘खाकी-खादी’ के गठजोड़ ने एक बार फिर आम जनता के सुकून को सरेआम नीलाम कर दिया है। अनूपपुर जिले की यह खबर इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब अफसरों की कलम और राजनेताओं की नीयत पर ‘राजस्व’ का नशा हावी हो जाता है, तो जनता की चीखें नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह जाती हैं। जनपद पंचायत जैतहरी के ग्राम पंचायत मेड़ियारास में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पवित्र शिव मंदिर और दो-दो उच्च शिक्षण संस्थानों (बी.एड. और नर्सिंग कॉलेज) की मर्यादा को ताक पर रखकर, महज 50 मीटर की दूरी पर शराब दुकान खोलने की अनुमति देना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यह सीधे तौर पर उन सफेदपोश राजनेताओं के खोखले वादों को कठघरे में खड़ा करता है जो मंचों से ‘नशामुक्त समाज’ और ‘महिला सुरक्षा’ का ढोंग रचते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे शराब माफियाओं को संरक्षण देने से बाज नहीं आते। वहीं, दूसरी तरफ जिला आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन के उन अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है, जिन्होंने चुनी हुई ग्राम पंचायत की आपत्तियों और ग्राम सभा के अधिकारों को अपने जूतों तले रौंदकर इस दुकान को हरी झंडी दे दी। नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाता प्रशासन का यह तानाशाही रवैया चीख-चीखकर पूछ रहा है कि आखिर चंद रुपयों के टैक्स के लिए नर्सिंग और बी.एड. कॉलेज की छात्राओं की सुरक्षा और पूरे गाँव के भविष्य को दांव पर लगाने का अधिकार इन साहबों को किसने दिया?

. कलेक्ट्रेट तक पहुँचा मामला
ग्राम पंचायत मेड़ियारास के सरपंच, उपसरपंच और पंचों सहित समस्त ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में सीधे जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी, कलेक्टर को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है। पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए शराब दुकान को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की पुरजोर मांग की है।

बिना ग्राम सभा की अनुमति के खुली दुकान
शिकायत पत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि दिनांक 16 मई 2026 को ग्राम पंचायत मेड़ियारास में अनूपपुर से चचाई जाने वाले मुख्य मार्ग पर इस नई शराब दुकान को खोला गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दुकान को खोलने के लिए न तो स्थानीय ग्राम सभा से कोई अनुमोदन लिया गया और न ही ग्राम पंचायत से किसी भी प्रकार की अनुमति या एनओसी प्राप्त की गई।

आबकारी विभाग की मनमानी उजागर
दस्तावेज़ों से साफ जाहिर होता है कि आबकारी विभाग ने स्थानीय स्वायत्तशासी संस्था ग्राम पंचायत के अधिकारों और स्थानीय जनता के हितों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी विभाग ने अपनी मनमानी चलाते हुए बिना किसी वैध स्थानीय अनापत्ति के इस शराब दुकान को संचालित करने की अनुमति दे दी, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

शैक्षणिक संस्थानों के पास खुली दुकान
इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि जिस स्थान पर शराब दुकान खोली गई है, उसके ठीक सामने और अत्यंत निकट कई महत्वपूर्ण संस्थान संचालित हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस चयनित स्थल के पास एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ( एक बी.एड. कॉलेज, एक नर्सिंग कॉलेज और साथ ही एक पवित्र शिव मंदिर भी स्थित है।
नियमों के मुताबिक किसी भी शराब दुकान का संचालन शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और स्वास्थ्य केंद्रों के ठीक पास नहीं किया जा सकता। लेकिन मेड़ियारास में इन सभी संस्थानों से शराब दुकान की दूरी मात्र 50 मीटर से 100 मीटर के भीतर है। इतनी कम दूरी पर शराब की दुकान खुलना प्रशासनिक नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाने जैसा है।

छात्राओं और मरीजों की सुरक्षा पर संकट
दुकान के इस स्थान पर खुलने से सबसे ज्यादा परेशानी कॉलेज की छात्राओं, अस्पताल आने वाले मरीजों और मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य मार्ग होने और पास में ही दो-दो कॉलेज होने के कारण यहाँ छात्राओं का आना-जाना लगातार बना रहता है, जिससे उनकी सुरक्षा और गरिमा पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।

पंचायत ने पहले ही निरस्त की थी अनापत्ति
प्राप्त दस्तावेज़ों (कार्यालय ग्राम पंचायत मेड़ियारास के पत्र क्रमांक 10/2026) के अनुसार, पंचायत ने इस संबंध में पहले जारी किए गए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र को संशोधित करते हुए एक नया पत्र जिला आबकारी अधिकारी को भेजा था। सरपंच रतनलाल कोल और सचिव अजय पटेल द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में साफ तौर पर लिखा गया था कि जनहित और जनसुविधा को देखते हुए ग्राम मेड़ियारास में शराब दुकान न खोली जाए।

प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
ग्राम पंचायत द्वारा जिला आबकारी अधिकारी को दिए गए स्पष्ट आवेदन के बावजूद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और दुकान का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहा, तब जाकर ग्रामीणों को सीधे जिले के कलेक्टर का दरवाजा खटखटाना पड़ा। पंचायत के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब चुनी हुई पंचायत के प्रस्ताव को ही अधिकारी ठंडे बस्ते में डाल देंगे, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा।

चक्काजाम और धरने की दी गई चेतावनी
ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह से जवाब दे चुका है। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में समस्त ग्रामवासियों ने प्रशासन को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। पत्र में स्पष्ट रूप से अल्टीमेटम दिया गया है कि यदि इस अवैध और अनैतिक रूप से खुली शराब दुकान को एक सप्ताह के भीतर यहाँ से हटाकर बंद नहीं किया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
यदि दी गई समयावधि के भीतर कार्रवाई नहीं होती है, तो समस्त ग्रामवासी अनूपपुर से चचाई मुख्य मार्ग पर, ठीक शराब दुकान के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और चक्काजाम शुरू कर देंगे। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि इस आंदोलन के दौरान यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है या किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

. जनप्रतिनिधियों और पंचों का मिला पूर्ण समर्थन
इस मांग को लेकर पूरी पंचायत एकजुट खड़ी दिखाई दे रही है। कलेक्टर को दिए गए पत्र में उपसरपंच सहित विभिन्न वार्डों के पंचों ने अपने हस्ताक्षर कर विरोध दर्ज कराया है। इनमें मुख्य रूप से वार्ड क्रमांक 10 से सजीदा परवीन, वार्ड 14 से पूरा बाई, वार्ड 15 से ललिता सिंह, वार्ड 8 से ललिता प्रजापति, वार्ड 2 से कतकूरा कोल, वार्ड 6 से जानकी बाई, वार्ड 4 से भारती केवट, वार्ड 3 से राकेश कोल, वार्ड 1 से दुर्गा प्रसाद और वार्ड 9 से शांति बाई सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर जन-सरोकार के मुद्दे पर क्या त्वरित एक्शन लेता है।