सहकारी बैंक में 100 करोड़ का घोटाला हुआ

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लोगों को नहीं मिल रहा खुद का जमा पैसा, बीमार महिला पहुंची अपने बच्चे के साथ कलेक्टर के द्वार

– कहा मेरी एफडी का पैसा निकलवाइये, 25 लाख रुपए जमा होने के बाद भी बीमारी के लिए नहीं मिल रहा पैसा

– शिवपुरी के जमाकर्ताओं की परेशानी

शिवपुरी। रंजीत गुप्ता। शिवपुरी के जिला सहकारी बैंक में करीब चार साल पहले 100 करोड रुपए के घोटाले के बाद लोगों को उनका जमा पैसा नहीं मिल रहा है। बैंक में जमा अपनी 25 लाख रुपए एचडी का पैसा निकलवाने के लिए कलेक्टर से शिकायत करने पहुंची सोनिया त्रिपाठी ने बताया कि उनका पैसा जिला सहकारी बैंक में जमा है लेकिन उनका जमा पैसा बैंक नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि उनके बचत खाते में 8 लाख रुपए और एफडी मिलाकर कुल 25 लाख रुपए जमा है लेकिन बैंक में हुए घोटाले के कारण यह जमा पैसा उनको नहीं दिया जा रहा है। सोनिया त्रिपाठी ने बताया कि उनके दिमाग की नसों में क्लॉट जम गया है जिससे वह बीमार रहती हैं और पुणे में अपना इलाज कर रही हैं। पुणे से शिवपुरी आने में उन्हें परेशानी होती है वह इतनी बीमार है कि उनकी याददाश्त कमजोर हो गई है। बैंक से पैसा नहीं मिल रहा है। पूर्व में अभी कई बार आवेदन दिए लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कलेक्टर से उन्होंने पैसा दिलवाने की मांग की।

जब बीमारी से मर ही जाऊंगी तो क्या होगा इस पैसे का-

कलेक्टर से शिकायत करने आई सोनिया ने बताया कि मेरे दिमाग की दो नसों में क्लॉट है, लेकिन इलाज कराने के लिए पैसे नहीं है। जिला सहकारी बैंक हमारा पैसा ही हमको नहीं दे रही। यदि मर ही गए तो फिर ऐसे पैसे का हम क्या करेंगे। सोनिया का कहना है कि मैं पुणे में काम करके जैसे-तैसे अपना घर चला रही हूं। एक बेटा है और बैंक में जमा पैसा मिलता नहीं है। मैं खुद इतनी बीमार हूं कि अगर सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो कुछ भी हो सकता है। अपने ही पैसे के लिए पूना से शिवपुरी किराया खर्च करके आना पड़ता है, लेकिन यहां पर बैंक वाले सात दिन में 2 हजार रुपए देने की बात बोलते हैं। अगर पैसा नहीं दे सकते तो मेरा आयुष्मान कार्ड ही बनवा दी जिससे अपना इलाज तो करवा लूं।

100 करोड़ के घोटाले के बाद लोगों का पैसा नहीं मिल रहा-

शिवपुरी के जिला सहकारी बैंक और इससे जुड़ी अन्य शाखों में एक चपरासी द्वारा कैशियर का प्रभार लेकर यहां पर 100 करोड रुपए का घोटाला कर दिया गय। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला जांच में गया। इस मामले में एक दर्जन से ज्यादा बैंक अधिकारी व कर्मचारियों पर एफआईआर व कार्रवाई हुई। मामला अभी न्यायालय में है। लेकिन इस घोटाले की रकम अभी तक बैंक को वापस नहीं मिल पाई है। इस घपले से बैंक की साख को भी नुकसान हुआ। बैंक की हालत यह है कि यहां पर हजारों जमाकर्ताओं का पैसा फंसा हुआ है। पिछले दिनों मप्र की मोहन सरकार ने 50 करोड़ रुपए की राशि भी बैंक को दी लेकिन इसके बाद भी यह राशि जमाकर्ताओं को नहीं दी जा रही।