न्यायालय के आदेश को ठेंगा: केल्हौरी में शासकीय भूमि पर ‘दबंगई’ का निर्माण, मौन खड़ा प्रशासन

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​चचाई/अनूपपुर। अनूपपुर जिले के ग्राम पंचायत केल्हौरी से कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाला एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहाँ तहसीलदार न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेश को रद्दी का टुकड़ा समझते हुए शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण का कार्य धड़ल्ले से जारी है। विडंबना यह है कि प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे हफ़्तों से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन रसूख के आगे जिम्मेदार अधिकारी ‘धृतराष्ट्र’ बने बैठे हैं।

क्या है पूरा विवाद?
​ग्राम पंचायत केल्हौरी स्थित आराजी खसरा क्रमांक 1595/1 के अंश रकवा 0.040 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत लंबे समय से की जा रही थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तहसीलदार अनूपपुर ने उक्त भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने और निर्माण कार्य रोकने हेतु स्थगन आदेश जारी किया था।

आदेश ताक पर, निर्माण जोरों पर
​न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद, स्थानीय निवासी गुल मोहम्मद उर्फ गुल्लू (पिता स्वर्गीय बाकर खान) द्वारा उक्त भूमि पर बेखौफ होकर मकान का निर्माण कराया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। सवाल यह उठता है कि जब न्यायालय ने रोक लगाई है, तो निर्माण सामग्री और मजदूर वहां तक कैसे पहुँच रहे हैं?

खाकी और खादी की भूमिका पर सवाल
​तहसीलदार अनूपपुर ने स्थगन आदेश के साथ ही चचाई पुलिस को कड़े निर्देश दिए थे कि:
​मौका मुआयना कर निर्माण कार्य तत्काल बंद कराया जाए।​अतिक्रमणकर्ता के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।​मौके पर मौजूद निर्माण सामग्री को जब्त किया जाए।
​हैरानी की बात यह है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बाद भी चचाई पुलिस, ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और स्थानीय राजस्व अमला मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमणकर्ता अपने प्रभाव और पैसे के दम पर सरकारी तंत्र को बौना साबित कर रहा है।

जनता का टूटता विश्वास
​स्थानीय निवासियों में इस प्रशासनिक शिथिलता को लेकर गहरा आक्रोश है। शिकायत कर्ता का कहना है कि जब न्यायालय का लिखित आदेश भी अवैध निर्माण नहीं रुकवा पा रहा, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? यह सीधे तौर पर राजस्व विभाग और पुलिस की मिलीभगत का परिणाम है।”

प्रशासनिक मिलीभगत या मजबूरी?
​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जब आदेश की कॉपी पुलिस और संबंधित पटवारी को तामील कराई जा चुकी है, तो फिर कार्रवाई की फाइल किन फाइलों के नीचे दबी है? सूत्रों का दावा है कि अतिक्रमणकर्ता को कुछ प्रभावशाली सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण मैदानी अमला मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। यदि समय रहते इस अवैध ढांचे पर बुलडोजर नहीं चला, तो यह न केवल शासकीय भूमि का नुकसान होगा, बल्कि क्षेत्र में भू-माफियाओं के हौसले और भी बुलंद हो जाएंगे।

न्यायपालिका की साख दांव पर
​न्यायालय के आदेश की अवहेलना सीधे तौर पर ‘कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट’ का मामला है। अब देखना यह होगा कि अनूपपुर जिला प्रशासन इस मामले में सख्ती दिखाते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करता है, या फिर रसूखदार अतिक्रमणकर्ता के आगे नियम-कायदे इसी तरह दम तोड़ते रहेंगे। शिकायत कर्ता ने अब इस मामले की शिकायत सीधे कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से करने का मन बना लिया है, ताकि कानून के राज को पुनः स्थापित किया जा सके।