अनूपपुर: प्रैक्टिकल लैब निर्माण कार्य में ठेकेदार कर रहा प्रैक्टिकल

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प्रैक्टिकल लैब निर्माण कार्य में ठेकेदार कर रहा प्रैक्टिकल

चोरी की बिजली और मुफ्त के पानी से बन रहा भवन

पंचायत की अनुमति को किया गया दरकिनार जारी है अवैध उत्खनन

अनूपपुर। शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और लगातार ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का भविष्य संवारने के उद्देश्य से शासन द्वारा तरह-तरह के प्रयास किया जा रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन के बीच मेडिएटर और ठेकेदार का जिम्मा उठाने वाले लोग शासन की इस मनसा पर पलीता लगाते हुए साफ नजर आ रहे हैं ऐसा ही एक नजारा प्रैक्टिकल भवन बनाने के दौरान देखने को मिल रहा है जहां पर प्रैक्टिकल भवन निर्माण कार्य में ठेकेदार जमकर प्रैक्टिकल कर रहा है इतना ही नहीं वह हरे भरे वृक्षों की बलि चढ़ाने के साथ ही चोरी की मिट्टी मुरूम और रेत से भी अपना जेब भरने का काम कर रहा है।
अनूपपुर। अनूपपुर जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सकरा के प्रांगण में प्रयोग भवन का निर्माण कार्य चल रहा है मिली जानकारी के अनुसार फिजिक्स केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय के लिए अलग-अलग लैब का निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी लागत लगभग 45 लाख रुपए बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार प्रैक्टिकल भवन निर्माण कार्य में तीन ठेकेदार मिलकर काम कर रहे हैं ऐसे में तीन ठेकेदारों की तिकड़ी इस निर्माण कार्य में एक अलग ही रंग दिखाने में आमदा है कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण स्थल में ना तो पानी की व्यवस्था है और ना ही बिजली की लेकिन निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहा है ठेकेदार चोरी की बिजली और चोरी के पानी से काम कर रहा है कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि यह निर्माण कार्य चोरी छुपे तरीके से किया जा रहा है वही इस पूरे निर्माण कार्य को लेकर ना तो पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया है और ना ही विद्यालय से किसी प्रकार की कोई अनुमति। बताया जा रहा है कि इनमें से एक ठेकेदार बड़े नेता का रिश्तेदार भी है जिस कारण से उनसे कोई भी कुछ कहने से डरता नजर आ रहा है।

विद्यालय की बिजली और पानी का दुरुपयोग

जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य में प्रतिदिन बिजली और पानी की आवश्यकता पड़ती है लेकिन ठेकेदारों के द्वारा इसके लिए कोई अनुमति और स्थाई कनेक्शन नहीं लिया गया है वही विद्यालय के प्रांगण मेला के बिजली कनेक्शन और पानी की व्यवस्था से ही अपना निर्माण कार्य कर रहे हैं जिस कारण से विद्यालय की व्यवस्था भी चारमरा रही है और विद्यालय पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ सकता है। आखिर लाखों रुपए के निर्माण कार्य से पहले बिजली और पानी की स्थाई और समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

पंचायत से क्यों नहीं ली गई एनओसी

पंचायत कर्मियों से चर्चा के दौरान पता चला कि निर्माण कार्य को लेकर पंचायत से ठेकेदारों द्वारा किसी प्रकार से अनुमति नहीं दी गई है और ना ही पंचायत उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया है इतना ही नहीं निर्माण कार्य में फीलिंग के लिए बांध के किनारे से मिट्टी निकालकर उसमें भरा जा रहा है जिसको लेकर ना तो वह पंचायत से अनुमति लिए है और ना ही खनिज विभाग से। ठेकेदारों की तिकड़ी इतनी हावी है कि पंचायत कर्मी भी इनके आगे नहीं टिकते हैं आखिर क्या ठेकेदारों का खौफ इतना ज्यादा है कि पंचायत की एनओसी भी उनके सामने फीकी पड़ जाए।

हरे भरे वृक्षों की चढ़ाई गई बली

मौका स्थल में निर्माण कार्य को देखकर साफ पता चल रहा है कि निर्माण स्थल में दर्जनों हरे-भरे और फलदार वृक्षों को काटे गए हैं जबकि वृक्षों को काटने और वहां पर निर्माण कार्य करने को लेकर एक अलग ही नियम होता है जिसको दरकिनार करते हुए ठेकेदारों ने जमकर भ्रष्टाचार किया है। वही इस पूरे मामले में अनुसूचित जनजाति कार्य विभाग अनूपपुर भी चुप्पी साधे हुए हैं।

गुणवत्ता के साथ जमकर हो रहा खिलवाड

निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और कामगारों से चर्चा के दौरान पता चला कि निर्माण कार्य में जिस तरह का सीमेंट इस्तेमाल हो रहा है उसकी गुणवत्ता ही समझ से परे है कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि खुली बोरी में सीमेंट बांधकर लाया जाता है और उसी से निर्माण कार्य जारी है बताया जा रहा है कि उक्त सीमेंट में राखड़ की मात्रा ज्यादा देखने को मिल रही है। वही निर्माण स्थल में ठेकेदारों के द्वारा निर्माण के संबंध में किसी प्रकार का साइन बोर्ड या सूचना पटल नहीं लगाया गया है जिससे साफ पता चलता है कि निर्माण की लागत विभाग और उसमें मिले लोगों की सांठगांठ साफ साफ दिखाई दे रहा है।

इनका कहना है-
हमारे द्वारा निर्माण कार्य सही तरीके से कराया जा रहा है तीन अलग-अलग काम है मैं अपना काम कर रहा हूं बाकी का मुझे जानकारी नहीं है।
घनश्याम तनवर, ठेकदार निर्माण कार्य

निर्माण कार्य को लेकर पंचायत से किसी प्रकार की एनओसी नहीं ली गई है और ना ही हमें कोई जानकारी है।
संतोष सिंह, सरपंच, ग्रापं सकरा