वन विभाग में ‘विधि प्रकोष्ठ’ का गठन, अदालती मामलों में लापरवाही पर लगेगी लगाम
भोपाल। मध्य प्रदेश वन विभाग ने अदालती प्रकरणों में बरती जा रही लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय स्तर पर एक समर्पित ‘विधि प्रकोष्ठ’ (लीगल सेल) गठित करने का निर्णय लिया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF & HoFF) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह प्रकोष्ठ आगामी 15 फरवरी 2026 से पूर्ण रूप से कार्य करना प्रारंभ कर देगा। विभाग ने यह कदम उन स्थितियों को देखते हुए उठाया है जहाँ विभिन्न शाखाओं में चल रहे कानूनी मामलों में प्रभारी अधिकारियों (OIC) द्वारा समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं करने या सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने के कारण विभाग को अदालती अवमानना का सामना करना पड़ रहा था। इससे न केवल विभाग की छवि धूमिल हो रही थी, बल्कि न्यायालयीन प्रकरणों में शासन का पक्ष रखने में भी विफलता दिख रही थी।
इस नवनिर्मित विधि प्रकोष्ठ के नियंत्रणकर्ता अधिकारी के रूप में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) को मनोनीत किया गया है। मुख्यालय स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कक्ष के सहयोग से एक विशेष ‘विधि प्रकोष्ठ पोर्टल’ भी तैयार किया जाएगा। इस प्रकोष्ठ में उन अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी जो पहले से ही इन दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। विभाग का मानना है कि इस केंद्रीकृत व्यवस्था से कानूनी प्रकरणों की सतत निगरानी हो सकेगी और भविष्य में अप्रिय स्थितियों से बचा जा सकेगा। इस संबंध में प्रदेश के सभी वन मंडलाधिकारियों, टाइगर रिजर्व के संचालकों और क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ स्टाफ को इस नई व्यवस्था के अनुरूप कार्य करने हेतु पाबंद करें।






