देपालपुर। संदीप सेन। शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी नक्शा पायलट योजना, जिसे भूमि और भवनों के डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से पारदर्शी प्रशासन और नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के उद्देश्य से लागू किया गया है, देपालपुर में पूरी तरह से पटरी से उतरती नजर आ रही है। 18 फरवरी 2025 को ड्रोन सर्वे के माध्यम से नगर परिषद क्षेत्र के लगभग 6500 प्लॉटों का डाटा एकत्रित किए जाने के बावजूद आज तक न तो इस डाटा का जमीनी सत्यापन शुरू हुआ है और न ही नगर परिषद व राजस्व विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है। शासन स्तर पर इस योजना को प्राथमिकता के साथ लागू करने, विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद देपालपुर में नगर परिषद, राजस्व विभाग, जनपद पंचायत और रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालात यह हैं कि योजना से संबंधित टीमें, जिनके गठन की बात कही गई थी, वे अधिकांश वार्डों और ब्लॉकों में दिखाई ही नहीं देतीं।
कागजों में विभाजन, जमीन पर सन्नाटा
नक्शा पायलट योजना के अंतर्गत देपालपुर नगर परिषद क्षेत्र को 15 वार्डों, 3 सेक्टर और 53 ब्लॉकों में विभाजित किया गया। प्रत्येक सेक्टर के लिए अलग-अलग टीमें तैनात करने और नियमित सर्वे, सत्यापन व आपत्ति निराकरण की प्रक्रिया चलाने का प्रावधान था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नागरिकों को न तो किसी प्रकार की सूचना मिली और न ही उनके क्षेत्र में किसी अधिकारी या कर्मचारी ने संपर्क किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना का क्रियान्वयन केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित रह गया है।
आम नागरिकों को नहीं मिल रहा लाभ
नक्शा पायलट योजना का मूल उद्देश्य संपत्ति सीमांकन से जुड़े विवादों का समाधान, रजिस्ट्री व नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाना, संपत्ति कर निर्धारण में पारदर्शिता लाना और शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना है। लेकिन योजना के ठप पड़े होने से इन सभी उद्देश्यों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि ड्रोन सर्वे के बाद भी जब डिजिटल नक्शे सार्वजनिक नहीं किए जा रहे, तो योजना का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
इंदौर जिले के कलेक्टर शिवम वर्मा जैसे संवेदनशील और अनुशासनप्रिय अधिकारी के कार्यकाल में भी देपालपुर में इस तरह की लापरवाही प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। यदि समय रहते नगर परिषद और राजस्व विभाग की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो यह योजना भी अन्य योजनाओं की तरह अधूरी रह जाएगी।
कार्रवाई और समीक्षा की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल नक्शा पायलट योजना की प्रगति की समीक्षा करे, फील्ड स्तर पर कार्य की वास्तविक स्थिति सामने लाए और लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। तभी शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का वास्तविक लाभ देपालपुर की जनता तक पहुंच पाएगा, अन्यथा नक्शा पायलट योजना देपालपुर में सिर्फ एक अधूरी घोषणा बनकर रह जाएगी।






