जनसुनवाई से पहले ‘सीएसआर’ का प्रलोभन: क्या यह ग्रामीणों की आवाज दबाने की कोशिश है?
पं अजय मिश्र
अनूपपुर। रक्सा-कोलमी क्षेत्र में प्रस्तावित पावर प्लांट परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में कंपनी (न्यू जोन इंडिया/टोरेंट पावर) द्वारा आयोजित किए गए शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य शिविरों को स्थानीय जागरूक नागरिक ‘जनसुनवाई से पूर्व की गई घेराबंदी’ के रूप में देख रहे हैं।
विश्लेषण करने पर इस पूरी कवायद के पीछे कई अनुत्तरित प्रश्न और विरोधाभास उभर कर सामने आते हैं:
1. जनसुनवाई बनाम जन-प्रलोभन
आगामी 7 जनवरी को होने वाली पर्यावरण जनसुनवाई से ठीक पहले इन गतिविधियों का आयोजन संयोग मात्र नहीं लगता। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अक्सर जनसुनवाई में होने वाले संभावित विरोध को कम करने के लिए ‘सीएसआर’ का सहारा लेती हैं। खेल सामग्री और डेस्क-बेंच का वितरण ग्रामीणों के मन में कंपनी की एक उदार छवि बनाने की कोशिश है, ताकि परियोजना से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और विस्थापन के मुद्दों पर चर्चा गौण हो जाए।
2. दीर्घकालिक नुकसान पर तात्कालिक लाभ का पर्दा
कंपनी ने स्वास्थ्य शिविर और स्कूलों में सामग्री वितरण पर जोर दिया है, लेकिन विश्लेषण यह कहता है कि
पर्यावरणीय प्रभाव: पावर प्लांट से भविष्य में होने वाले वायु और जल प्रदूषण का स्थानीय स्वास्थ्य पर क्या असर होगा, इसका कोई जिक्र नहीं है
आजीविका का संकट: रक्सा-कोलमी के किसानों की उपजाऊ भूमि और जल स्रोतों पर इस परियोजना के पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव की तुलना में कुछ स्पोर्ट्स किट और डेस्क-बेंच का मूल्य नगण्य है।
3. पारदर्शिता का अभाव और ‘प्रायोजित’ संवाद
कंपनी द्वारा पारदर्शी संवाद’ का दावा किया गया है, लेकिन क्या ग्रामीणों को परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव की तकनीकी बारीकियों और भविष्य के खतरों के बारे में विस्तार से बताया गया? अक्सर ऐसी बैठकों में कंपनी केवल लाभ गिनाती है, जबकि विस्थापन और पुनर्वास नीतियों की जटिलताओं को ‘सकारात्मकता’ के नाम पर ढक दिया जाता है।
4. स्थानीय प्रशासन और कंपनी की जुगलबंदी
इस पूरे आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि कंपनी ने पहले ही सत्ता के गलियारों में अपनी पैठ बना ली है। ऐसे में एक साधारण किसान के लिए अपनी जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए निष्पक्ष मंच मिलना मुश्किल दिखाई देता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश स्वागत योग्य है, लेकिन यदि इसका उपयोग किसी बड़ी औद्योगिक परियोजना के विरोध को शांत करने के लिए एक ‘ढाल’ के रूप में किया जा रहा है, तो यह स्थानीय समुदाय के साथ न्याय नहीं है। रक्सा-कोलमी के निवासियों को यह समझने की आवश्यकता है कि सीएसआर के तहत मिलने वाली ये सुविधाएं उनका अधिकार हैं, न कि उनकी जमीन और शुद्ध हवा का सौदा।







