अदालत के आदेशों की सरेआम धज्जियां, कलेक्टर अनूपपुर को अवमानना पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश

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मध्य प्रदेश शासन के सख्त तेवर
अनूपपुर। तंत्र की सुस्ती और प्रशासनिक लालफीताशाही जब न्याय की धज्जियां उड़ाने पर आमादा हो जाए, तो आम नागरिक की चीखें केवल फाइलों में दफन होकर रह जाती हैं। मध्य प्रदेश में अदालती फैसलों को ठेंगा दिखाने की प्रवृत्ति अब इस हद तक बढ़ चुकी है कि शासन को खुद हस्तक्षेप कर जिला प्रशासन के कान मरोड़ने पड़ रहे हैं। ताजा मामला अनूपपुर जिले से सामने आया है, जहां माननीय न्यायालय के आदेशों को खुली चुनौती देते हुए निजी व्यक्तियों द्वारा लगातार अवमानना की जा रही है, और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए मंत्रालय के वल्लभ भवन से जो फरमान जारी हुआ है, उसने प्रशासनिक अमले में भारी खलबली मचा दी है। राजस्व विभाग के अवर सचिव राजेश कुमार द्वारा कलेक्टर अनूपपुर को सीधे शब्दों में चेताया गया है कि न्यायालय के आदेशों की अवमानना अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह तीखा निर्देश इस बात का जीता-जाता प्रमाण है कि निचले स्तर पर कानून के राज को किस प्रकार कागजी घोड़ों की भेंट चढ़ाया जा रहा है, जिससे शासन की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

क्या है पूरा मामला? कागजों में कैद न्याय की दास्तान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला अनूपपुर जिले के प्रार्थी सनत कुमार त्रिपाठी द्वारा उठाई गई शिकायतों पर आधारित है। आवेदक ने शासन और न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाते हुए यह गुहार लगाई थी कि किस प्रकार प्रभावशाली निजी व्यक्तियों द्वारा माननीय द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 01, अनूपपुर, मध्य प्रदेश के द्वारा व्यवहारवाद प्रकरण क्रमांक 283ए/18 में पारित स्थगन आदेश दिनांक 10/01/2019 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अदालत ने स्पष्ट रूप से निजी व्यक्तियों द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया था, परंतु जमीनी स्तर पर इसका पालन कराने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ।

प्रशासनिक सुस्ती और अवमानना का खुला खेल
न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद मौके पर नियमों को ताक पर रखकर कार्य किए जाते रहे और निजी व्यक्तियों द्वारा लगातार मनमानी जारी रखी गई। सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि स्थानीय प्रशासनिक मशीनरी ने इस गंभीर अवमानना पर या तो आंखें मूंद लीं या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब पीड़ित की न्याय की आस टूटने लगी, तब उसने शासन स्तर पर गुहार लगाई, जिसके बाद राज्य शासन के राजस्व विभाग ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

मंत्रालय का कड़ा आदेश: अब नहीं बचेगी लापरवाही
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग, वल्लभ भवन, भोपाल ने दिनांक 24-07-2026 को पत्र क्रमांक 2379 के माध्यम से अनूपपुर कलेक्टर को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अवर सचिव राजेश कुमार द्वारा जारी इस पत्र में यह साफ किया गया है कि संलग्न संदर्भ पत्र और दस्तावेजों का अवलोकन कर तत्काल प्रभाव से नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए और की गई कार्रवाई से शासन को अविलंब अवगत कराया जाए।

न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका: जवाबदेही तय करने की चुनौती
यह प्रकरण एक बार फिर इस ज्वलंत सवाल को जन्म देता है कि क्या देश में अदालती आदेशों का पालन कराना केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है? जब तक जिला प्रशासन और मैदानी अमला अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और मुस्तैदी नहीं लाएगा, तब तक आम जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास डगमगाता रहेगा। अनूपपुर कलेक्टर के समक्ष अब यह बड़ी अग्निपरीक्षा है कि वे इस मामले में कितनी जल्दी और निष्पक्षता से कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
शासन के इस सख्त आदेश के बाद अब अनूपपुर जिला प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है। प्रार्थी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन सचमुच उन व्यक्तियों के खिलाफ शिकंजा कस पाएगा जिन्होंने अदालत के आदेशों की अवमानना की है। यदि इस मामले में त्वरित और ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो यह प्रशासनिक विफलता का एक और काला अध्याय बन जाएगा, जो सीधे तौर पर न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती देता है।