स्थानांतरण नीति पर छिड़ा संग्राम: अनुपपुर कलेक्टर को ‘धरना’ देने की चेतावनी

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म.प्र. राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग सख्त
अनुपपुर। मध्य प्रदेश के अनुपपुर जिले में प्रशासनिक स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जिला स्थानांतरण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए म.प्र. राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्थानांतरण में गंभीर अनियमितताओं और संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए प्रशासन को दो दिनों के भीतर सुधार न होने पर कलेक्ट्रेट के समक्ष शांतिपूर्ण धरने पर बैठने की चेतावनी दी है।
आयोग के अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का मुख्य मुद्दा उठाया गया है। पत्र के अनुसार, जिला स्थानांतरण बोर्ड द्वारा की गई हालिया तबादला सूची में शासन के मानवीय दृष्टिकोण और प्रचलित दिशा-निर्देशों की स्पष्ट अनदेखी की गई है। इस प्रशासनिक विसंगति ने जिले के शासकीय कर्मचारियों के बीच असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है।
विशेष रूप से दिव्यांग कर्मचारियों, निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य से जुड़े कर्मियों और महिला कर्मचारियों के स्थानांतरण में बरती गई संवेदनहीनता पर आयोग ने गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग का तर्क है कि स्थानांतरण के समय इन संवेदनशील वर्गों की विशिष्ट परिस्थितियों और शासन द्वारा निर्धारित विशेष प्रावधानों का पालन किया जाना अनिवार्य था, जिसे पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, रामलाल रौतेल ने मुख्यमंत्री, जिले के प्रभारी मंत्री और अनुपपुर कलेक्टर को लिखित रूप से अवगत कराकर स्थानांतरण आदेशों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है। आयोग ने आग्रह किया है कि तत्काल प्रभाव से नियमों के विपरीत हुए स्थानांतरण आदेशों में न्यायसंगत संशोधन किया जाए, ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय न हो और प्रशासनिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी प्रकार के टकराव के लिए नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। यदि प्रशासन आगामी दो दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं करता है, तो आयोग जनहित में कलेक्ट्रेट के सामने धरना देने के लिए मजबूर होगा। इस पूरी स्थिति के लिए आयोग ने संबंधित प्रशासन और जिला स्थानांतरण बोर्ड को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया है।