गजाला परवीन पर सेवा शुल्क में कथित अनियमितता का आरोप, जांच की मांग को लेकर CMO को सौंपा ज्ञापन

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गजाला परवीन पर सेवा शुल्क में कथित अनियमितता का आरोप, जांच की मांग को लेकर CMO को सौंपा ज्ञापन

अनूपपुर। नगर पालिका परिषद अनूपपुर में सेवा शुल्क की कटौती एवं कथित फर्जी रसीद जारी किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार को नगर के नागरिकों एवं प्रभावित आवेदकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) शशांक अर्मो को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

शिकायतकर्ताओं द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका परिषद अनूपपुर में पदस्थ सहायक राजस्व निरीक्षक श्रीमती गजाला परवीन द्वारा सक्षम अधिकारी की अनुमति एवं विधिवत आदेश के बिना श्री विमलचंद्र, श्री कमलचंद्र एवं श्री अनिल जायसवाल के नाम से सेवा शुल्क काट दिया गया। आवेदकों का कहना है कि यह कार्रवाई नगर पालिका के निर्धारित नियमों एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के विपरीत प्रतीत होती है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि जब नगर पालिका के कर्मचारी श्री अखिलेश सिंह संबंधित स्थल पर मौखिक सूचना देने पहुंचे, तब यह जानकारी प्राप्त हुई कि संबंधित सेवा शुल्क पहले ही काटा जा चुका है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार श्री अखिलेश सिंह ने प्रथम दृष्टया संबंधित रसीद को संदिग्ध बताया। बाद में यह जानकारी सामने आई कि उक्त रसीद श्रीमती गजाला परवीन की यूज़र आईडी (लॉगिन आईडी) से जारी हुई है। आवेदकों ने मांग की है कि नगर पालिका के कंप्यूटर रिकॉर्ड, लॉगिन हिस्ट्री एवं संबंधित अभिलेखों की तकनीकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त रसीद किसके द्वारा, किसके निर्देश पर तथा किस सक्षम अधिकारी की अनुमति के आधार पर जारी की गई।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्री साजन दास केवलानी के मामले में भी इसी प्रकार की कथित फर्जी रसीद जारी किए जाने की जानकारी मिली है। आवेदकों ने मांग की है कि केवल एक मामले तक जांच सीमित न रखी जाए, बल्कि ऐसे सभी मामलों की जांच कराई जाए, जिनमें इसी प्रकार की अनियमितताओं की आशंका हो।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति एवं विधिसम्मत आदेश के किसी भी व्यक्ति के नाम से सेवा शुल्क काटा गया है, तो यह न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है बल्कि इससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

आवेदकों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा लगातार ऐसे कार्य किए जा रहे हैं, जिनसे नगर पालिका परिषद को आर्थिक क्षति पहुँची है अथवा भविष्य में आर्थिक नुकसान होने की संभावना उत्पन्न हुई है। इसलिए उनके द्वारा किए गए समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों की भी विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है।

ज्ञापन में यह मुद्दा भी उठाया गया कि संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद यदि उन्होंने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, तो इस तथ्य की भी जांच कर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, कथित फर्जी रसीदों की तकनीकी जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी शशांक अर्मो ने कहा—

“शिकायत प्राप्त हुई है। मामला हमारे संज्ञान में आया है। आवेदन में लगाए गए सभी बिंदुओं एवं प्रस्तुत दस्तावेजों की विधिवत जांच कराई जाएगी। लगभग एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”