शिकायतकर्ता ने दर्ज कराए बयान और सौंपे पुख्ता सबूत,
1 जून को अंतिम पेशी
अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के खेल विभाग में पिछले पांच वर्षों से चल रहे कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया है। जहाँ एक तरफ आरोपी अधिकारी जांच समिति के बुलावे पर भी नदारद रहे, वहीं दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज करा दिए हैं और भ्रष्टाचार की पोल खोलते कई अहम दस्तावेज भी सौंप दिए हैं। इस सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद जांच समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी जिला क्रीड़ा अधिकारी को 1 जून को हाजिर होने का अंतिम मौका दिया है, जिसके बाद सीधे एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
“फाइलें तैयार थीं, जांच दल मुस्तैद था और शिकायतकर्ता अपनी गवाही के साथ डटा था; बस गायब थे तो वो अधिकारी जिन पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने का आरोप है। अनूपपुर खेल विभाग में करोड़ों के कथित घोटाले की जांच के पहले ही दिन नियमों को ठेंगा दिखाकर जिला क्रीड़ा अधिकारी तो नहीं पहुंचे, लेकिन सजग शिकायतकर्ता ने बंद कमरे में जांच समिति के सामने ऐसे अकाट्य दस्तावेज और बयान दर्ज करा दिए हैं, जिसने विभाग की नींद उड़ा दी है। अब बच निकलने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और 1 जून की तारीख इस पूरे महाघोटाले का भविष्य तय करने वाली है।
. जांच के पहले ही दिन आरोपी अधिकारी रहे नदारद
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार (29 मई 2026) को विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी जैतहरी कार्यालय में जांच समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में जिला क्रीड़ा अधिकारी एवं माध्यमिक शिक्षक शेख खलील कुरैशी को अपने वित्तीय अभिलेखों के साथ सुबह 11:00 बजे उपस्थित होना था। जांच दल के सदस्य घंटों फाइलों को खोलकर उनके आने की राह तकते रहे, लेकिन कुरैशी ने कार्यालय पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारी के इस रवैये को जांच को टालने और प्रशासनिक आदेशों की सरेआम अवहेलना करने के रूप में देखा जा रहा है।
. शिकायतकर्ता ने दर्ज कराए तीखे बयान
जहां एक तरफ आरोपी अधिकारी जांच से मुंह चुराते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता पूरी तैयारी के साथ जांच समिति के सामने उपस्थित हुए। उन्होंने बंद कमरे में जांच दल के सदस्यों के सामने अपने विस्तृत बयान दर्ज कराए। अपने बयानों में बिंदुवार तरीके से समझाया कि किस प्रकार खेल विभाग में पिछले कई वर्षों से खिलाड़ियों के नाम पर आने वाले बजट और सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा था।
शिकायतकर्ता केवल बयान दर्ज कराकर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने अपने दावों को साबित करने के लिए जांच समिति को कई महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज भी सौंप दिए हैं। इन दस्तावेजों में खेल सामग्री की फर्जी खरीदी, आयोजनों के नाम पर तैयार किए गए संदिग्ध कोटेशन और वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर किए गए भुगतानों का पूरा ब्यौरा शामिल है। इन पुख्ता सबूतों के फाइल में शामिल होते ही अब जांच समिति का पलड़ा भारी हो गया है और आरोपी अधिकारी की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
वर्ष 2021 से चल रहा था अग्रिम राशि के समायोजन का खेल
यह पूरा गंभीर प्रकरण अनूपपुर खेल विभाग में वर्ष 2021 से लेकर अब तक दी गई विभिन्न अग्रिम राशियों (एडवांस अमाउंट) के समायोजन न किए जाने और उसमें हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है। नियमों के अनुसार, किसी भी खेल प्रतियोगिता या आयोजन के लिए निकाली गई अग्रिम राशि का देयक वाउचर समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य होता है। परंतु, इस मामले में पिछले पांच सालों से लाखों रुपये की एडवांस राशि का कोई अता-पता नहीं था, जिसके संबंध में बीईओ कार्यालय जैतहरी ने पत्र के जरिए ब्यौरा तलब किया था।
दो वरिष्ठ प्राचार्यों की जांच समिति खंगाल रही है सच
इस संवेदनशील मामले की निष्पक्षता से जांच करने के लिए सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग अनूपपुर के आदेश पर एक बेहद मजबूत जांच दल का गठन किया गया है। इस दल में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खांडा के प्राचार्य मुलायम सिंह परिहार और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गौरेला के प्राचार्य हर प्रसाद तिवारी जैसे कड़क और निष्पक्ष अधिकारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए नए दस्तावेजों के बाद अब यह जांच समिति इन कागजातों की बारीकी से स्क्रूटनी करने में जुट गई है।
जांच से दूरी बनाने पर प्रशासनिक हलकों में उठीं उंगलियां
आरोपी जिला क्रीड़ा अधिकारी शेख खलील कुरैशी का जांच के पहले ही दिन अनुपस्थित रहना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक जानकारों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारी ने कोई वित्तीय गड़बड़ी नहीं की थी और उनके पास अपनी बेगुनाही के पुख्ता सबूत थे, तो उन्हें जांच समिति के सामने सीना तानकर आना चाहिए था। उनका इस तरह गायब रहना कहीं न कहीं इस बात पर मुहर लगाता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है और वे वित्तीय विसंगतियों का सामना करने से डर रहे हैं।
जांच समिति का अल्टीमेटम: 1 जून को हाजिर होने का अंतिम मौका
शिकायतकर्ता के बयानों और दस्तावेजों को संज्ञान में लेने के बाद जांच समिति ने आरोपी अधिकारी के प्रति सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में भ्रष्टाचार के मामले में ढील नहीं दी जाएगी। बीईओ जैतहरी और जांच दल ने शेख खलील कुरैशी को अंतिम अवसर देते हुए आदेश जारी किया है कि वे आगामी 1 जून को प्रात: 11:00 बजे हर हाल में अपने मूल दस्तावेजों और देयक वाउचरों के साथ समिति के समक्ष उपस्थित हों।
अनुपस्थिति की दशा में होगी एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई और एफ आई आर
जांच समिति ने अपनी अंतिम चेतावनी में साफ लहजे में कहा है कि यदि 1 जून को भी कुरैशी उपस्थित नहीं होते हैं, तो इसे उनकी अंतिम सहमति मानकर उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता के बयानों के आधार पर सीधे एकतरफा कार्रवाई कर दी जाएगी। सरकारी धन के दुरुपयोग और वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों की अवहेलना के इस गंभीर मामले में दोषी पाए जाने पर सेवा से निलंबन, विभागीय जांच और गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने जैसी कठोरतम दंडात्मक अनुशंसा सहायक आयुक्त को भेज दी जाएगी।






