
कल कलेक्टर कार्यालय का करेंगे घेरा
अनूपपुर।मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में इस समय राजनीतिक पारा पूरी तरह गरमाया हुआ है। जनपद पंचायत अनूपपुर में जिला प्रशासन की कथित कार्यप्रणाली और लापरवाही को लेकर जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामला जनपद पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा है, जिस पर नियमानुसार समय बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 मई 2026 को जनपद पंचायत अनूपपुर के सदस्यों द्वारा नियमानुसार जिला प्रशासन के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आगामी बैठक हेतु नोटिस जारी किया जाना चाहिए था। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के कई दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा न तो कोई कार्रवाई की गई है और न ही इस संबंध में आवश्यक बैठक बुलाने हेतु कोई नोटिस जारी किया गया है।
लोकतंत्र में चुनी हुई आवाज़ को दबाने का आरोप
इस पूरे गतिरोध को लेकर जनपद पंचायत सदस्यों ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है। सदस्यों का कहना है कि प्रशासन का यह रुख पूरी तरह से अन्यायपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और घोर लापरवाही को दर्शाता है। जनप्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में कहा:
लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को इस तरह प्रशासनिक हीलाहवाली से दबाया नहीं जा सकता। नियमों के तहत तुरंत कार्रवाई होनी ही चाहिए।”
कल दोपहर 12 बजे ‘कलेक्टर दफ्तर’ कूच की तैयारी
प्रशासन के इस उदासीन रवैये के विरोध में अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, कल दोपहर ठीक 12:00 बजे जनपद पंचायत अनूपपुर के लगभग तीन-चौथाई सदस्य (संख्या करीब 14 से 15 सदस्य) एकजुट होकर सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे।
सदस्य वहां पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इस दौरान जनप्रतिनिधि प्रशासन से यह सीधा जवाब मांगेंगे कि अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के इतने दिनों बाद भी बैठक का नोटिस जारी करने में आखिर इतनी देरी क्यों और किसके शह पर की जा रही है?
आगे क्या?
एक साथ तीन-चौथाई सदस्यों के लामबंद होने से जिला प्रशासन पर भारी दबाव बनना तय माना जा रहा है। यदि कल सदस्यों को प्रशासन की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब या त्वरित कार्रवाई का आश्वासन नहीं मिलता है, तो आने वाले दिनों में यह प्रशासनिक गतिरोध एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल, कल होने वाले इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।






