
7 दिन में मांगी रिपोर्ट रसूखदारों पर गिरेगी गाज या फाइलों में दबेगा घोटाला? कलेक्टर के आदेश से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप!
पं अजय मिश्र
अनूपपुर। खेल के मैदान जहां युवाओं के भविष्य और प्रतिभा को तराशने के लिए होते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले का खेल विभाग खुद ‘भ्रष्टाचार के खेल’ का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है। लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं, कागजी बिलों के सहारे सरकारी खजाने की सरेआम लूट और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को ठेंगे पर रखने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शासन की साख को दांव पर लगा दिया है। स्थानीय सजग नागरिक की शिकायत और मीडिया के तीखे तीरों के बाद, आखिरकार सोते हुए प्रशासनिक तंत्र को जागना पड़ा है। कार्यालय कलेक्टर (जनजातीय कार्य विभाग) ने इस अंधेरगर्दी पर कड़ा प्रहार करते हुए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित इस कड़े सरकारी फरमान ने भ्रष्ट अधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इस बार जांच दल को महज **07 दिनों के भीतर** दूध का दूध और पानी का पानी करने की मोहलत दी गई है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति धरातल पर उतरेगी या फिर रसूख की ढाल इन बेखौफ अफसरों को एक बार फिर बचा लेगी।
जनहित की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई
इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अनूपपुर के स्थानीय निवासी द्वारा खेल विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने खेल विभाग अनूपपुर के अंतर्गत बड़े पैमाने पर की गई वित्तीय अनियमितताओं, नियमों की अनदेखी और शासकीय आदेशों की अवहेलना को लेकर पुख्ता दस्तावेज पेश किए थे। इस गंभीर शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया है।
कलेक्टर के निर्देश पर उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यालय कलेक्टर (जनजातीय कार्य विभाग) जिला अनूपपुर द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत खेल विभाग के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष और गहन जाँच करने के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन किया गया है। इस समिति को मामले की हर परत को खंगालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ये अधिकारी करेंगे जांच
प्रशासन द्वारा गठित इस जाँच समिति में शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्र के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि जाँच बिना किसी दबाव के पूरी हो सके जिसमें शिरीष कुमार श्रीवास्तव विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, विकासखण्ड जैतहरी मुलायम सिंह प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खांडा समिति सदस्य एवं हरप्रसाद तिवारी प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गौरेला शामिल है अब इनके द्वारा की गई शिकायत की जांच की जाएगी
सात कार्यदिवस के भीतर मांगी गई रिपोर्ट
सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग अनूपपुर (म.प्र.) की ओर से जारी इस आदेश में समिति को कड़े निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, समिति को शिकायती आवेदन में उल्लेखित एक-एक बिंदु की सूक्ष्मता से जाँच करनी होगी। इसके साथ ही, जाँच की गति को तेज रखने के लिए समिति को 07 दिवस के भीतर अपनी विस्तृत जाँच प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपलब्ध कराने का समय तय किया गया है।
करोड़ों के खेल घोटाले और “बैकडोर एंट्री” के आरोप
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और समाचार पत्रों में छपी खबरों के अनुसार, अनूपपुर खेल विभाग में यह भ्रष्टाचार कोई नया नहीं है। पूर्व में भी लाखों-करोड़ों रुपये के खेल घोटालों की बातें सामने आ चुकी हैं। आरोप है कि विभाग में खेल सामग्री की खरीदी से लेकर मैदानों के रख-रखाव तक में भारी हेरफेर की गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए “बैकडोर एंट्री” और चहेतों को टेंडर देने की प्रक्रिया धड़ल्ले से अपनाई गई।
बजट समायोजन और ‘अग्रिम राशि’ का बड़ा खेल
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप वर्ष 2021 से लेकर अब तक विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर निकाली गई ‘अग्रिम राशि’ के समायोजन को लेकर हैं। नियमानुसार, किसी भी आयोजन के बाद खर्च का बिल-वाउचर तुरंत प्रस्तुत करना होता है। लेकिन खेल विभाग के कई मामलों में लाखों रुपये का हिसाब सिर्फ कागजों में ही दबा रह गया। प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दिए गए आदेशों के बावजूद महीनों तक वित्तीय फाइलें दबाकर रखी गईं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
खिलाड़ियों के भविष्य और प्रतिभा पर मंडराया संकट
खेल विभाग के इस अड़ियल और भ्रष्ट रवैये का सबसे बुरा असर अनूपपुर क्षेत्र के प्रतिभावान युवा खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। खेल मैदानों की बदहाली और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण खिलाड़ी बुनियादी स्तर पर भी अभ्यास नहीं पा रहे हैं। खिलाड़ियों के हक का पैसा कागजी घोड़ों और फर्जी बिलों की भेंट चढ़ रहा है, जिससे खेल प्रेमियों और युवाओं में शासन-प्रशासन के खिलाफ गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
‘ समाचार ने किया था बड़ा खुलासा
इस पूरे घोटाले को समाचार पत्र ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र ने अपने “खास खबर” कॉलम में कार्टून और तस्वीरों के माध्यम से दिखाया था कि कैसे खेल विभाग में ‘रिश्वत’ का खेल चल रहा है और किस तरह रसूखदार अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद से ही जिला प्रशासन पर कार्रवाई करने का भारी दबाव था।
क्या होगी बेखौफ अधिकारियों पर कार्रवाई?
अब पूरे जिले की नजरें कलेक्टर और जाँच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। मध्य प्रदेश शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत जनता यह मांग कर रही है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर तत्काल निलंबन और रिकवरी की सख्त कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते इन “बेखौफ” चेहरों को बेनकाब नहीं किया गया, तो सरकारी खजाने की लूट यूं ही जारी रहेगी। देखना दिलचस्प होगा कि सात दिनों के भीतर आने वाली यह रिपोर्ट क्या रंग लाती है।






