अनूपपुर नगर पालिका में पारदर्शिता पर लगा ग्रहण, उपाध्यक्ष ने खोला मोर्चा

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

प्रशासनिक तानाशाही या भ्रष्टाचार का खेल?

अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की नगर पालिका परिषद इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा अपने आंतरिक प्रशासनिक गतिरोध और सूचनाओं की लुका-छिपी के कारण चर्चा का केंद्र बनी हुई है। परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती सोनाली तिवारी ने नगर पालिका प्रशासन के विरुद्ध कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यह विवाद तब उपजा जब जनप्रतिनिधि द्वारा मांगी गई जानकारी को अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
पूरे मामले की जड़ विभागीय वसूली और राजस्व के हिसाब-किताब से जुड़ी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पालिका परिषद अनूपपुर के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण मदों जैसे- आम बाजार बैठकी, पशु बाजार और सुलभ कॉम्प्लेक्स व बस स्टैंड के ठेके मार्च 2026 में समाप्त हो चुके हैं। इसके बाद, अप्रैल 2026 से इन क्षेत्रों से राजस्व की वसूली सीधे विभाग द्वारा की जा रही है। इसी वसूली की पारदर्शिता को लेकर उपाध्यक्ष ने सवाल उठाए हैं।
विगत 11 मई 2026 को उपाध्यक्ष श्रीमती सोनाली तिवारी ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर (पत्र क्रमांक 192/2026) विभागीय वसूली से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे थे। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि जनहित और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि राजस्व वसूली का पूरा विवरण परिषद के सामने हो। इसके लिए अधिकारियों को मात्र दो दिन का समय दिया गया था।
श्रीमती तिवारी द्वारा मांगे गए दस्तावेजों में अप्रैल 2026 से 10 मई 2026 तक का दिनांकवार वसूली विवरण, काटी गई रसीदों की सत्यापित छायाप्रति और वसूली कार्य में लगे कर्मचारियों व अधिकारियों के नाम व पदनाम शामिल थे। इसके पीछे मंशा यह थी कि क्या सरकारी खजाने में जमा होने वाला पैसा नियमानुसार वसूला जा रहा है या इसमें किसी प्रकार का निजी स्वार्थ सिद्ध किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने जानकारी उपलब्ध कराना तो दूर, पत्र का जवाब देना भी उचित नहीं समझा। अधिकारियों के इस मौन ने भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और बल दे दिया है। उपाध्यक्ष का कहना है कि यदि सब कुछ नियम संगत है, तो जानकारी छिपाने का क्या औचित्य है?
अधिकारियों की इस उदासीनता से क्षुब्ध होकर उपाध्यक्ष ने पुनः 15 मई 2026 को एक और कड़ा पत्र (अनुस्मारक पत्र क्रमांक 195/2026) जारी किया। इस पत्र में उन्होंने अधिकारियों को चेताया है कि जानकारी उपलब्ध न कराना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और जनता के साथ विश्वासघात है। उन्होंने प्रशासन के इस रवैये को ‘अलोकतांत्रिक’ करार दिया है।
उपाध्यक्ष ने अपने ताजा पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अब भी जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो वे इस पूरे प्रकरण की विधिवत शिकायत जिला कलेक्टर, आयुक्त नगरीय प्रशासन विभाग एवं अन्य उच्चाधिकारियों से करेंगी। उन्होंने साफ किया है कि भविष्य में होने वाली किसी भी कानूनी या प्रशासनिक कार्यवाही के लिए संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
नगर पालिका के गलियारों में यह चर्चा आम है कि विभागीय वसूली में भारी अनियमितताएं हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों का भी आरोप है कि रसीद कट्टे और वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। ऐसे में उपाध्यक्ष द्वारा उठाई गई मांग को जनहित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि को ही जानकारी नहीं मिलेगी, तो आम जनता का क्या होगा?
उपाध्यक्ष श्रीमती सोनाली तिवारी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि नगर पालिका जनता की संपत्ति है और इसके राजस्व का एक-एक पैसा जनता के विकास में लगना चाहिए। यदि विभागीय वसूली के नाम पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हो रही है, तो वे उसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे इस मामले को अंतिम अंजाम तक ले जाएंगी ताकि दोषियों पर कार्यवाही हो सके।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पालिका अनूपपुर में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारियों की चेतावनी के बाद नगर पालिका प्रशासन रिकॉर्ड पेश करता है या फिर यह मामला किसी बड़े प्रशासनिक जांच की भेंट चढ़ेगा। क्या वाकई अनूपपुर नगर पालिका में पारदर्शिता बहाल होगी या भ्रष्टाचार का यह साया और गहरा होता जाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।