भ्रष्टाचार के शूरवीरों पर सीईओ का हंटर

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60 सरपंचों की कुर्सी खतरे में, अब उगलनी होगी गबन की पाई पाई

उमरिया/ घुलघुली।  देवलाल सिंह। जिले की पंचायतों में विकास के नाम पर मलाई चाटने वाले सरपंचों के अच्छे दिन अब लद चुके हैं। जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना तीसरा नेत्र खोलते हुए जिले के 60 सरपंचों के खिलाफ वसूली का ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिससे निकलना अब इन जनसेवकों के लिए नामुमकिन नजर आ रहा है। मानपुर, पाली और करकेली जनपद पंचायतों के इन 60 महारथियों ने शासन की योजनाओं को अपनी निजी जागीर समझकर जो गबन किया था, अब उसकी पाई-पाई का हिसाब सरकारी खजाने में जमा करना होगा।
कुर्सी भी जाएगी और जेल की हवा भी खाएंगे
जिला पंचायत के न्यायालय में मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 89 और 92 के तहत जो 59 मुकदमों की फाइलें धूल फांक रही थीं, उन पर सीईओ ने बिजली की गति से फैसला सुना दिया है। आदेश साफ है: या तो पैसा जमा करो, वरना अगले 6 साल तक राजनीति की चौखट भूल जाओ। अगर 15 दिनों के भीतर इन सरपंचों ने गबन की गई राशि जिला पंचायत के पंजाब नेशनल बैंक वाले खाते में जमा नहीं की, तो उन पर निर्वाचन की 6 साल की रोक लगा दी जाएगी। यानी, अगले दो चुनावों तक ये साहबान केवल घर बैठकर टीवी पर चुनाव देख पाएंगे।
सरपंचों की संपत्ति होगी नीलाम
मजे की बात यह है कि इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल सचिव और ग्राम रोजगार सहायक पहले ही रडार पर आ चुके हैं। उनके वेतन से हर महीने वसूली की किस्त काटी जा रही है, लेकिन असली पेच तो सरपंचों के साथ फंसा है। सीईओ अभय सिंह ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन का अतिरिक्त मोहलत वाला ऑफर भी इन सरपंचों को समझ नहीं आता, तो धारा 92 (क) के तहत इनकी चल-अचल संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी की जाएगी। यानी जिस ठाठ-बाट और सरकारी पैसे से गाडिय़ां और मकान बनाए गए हैं, उन पर प्रशासन का हथौड़ा चलेगा। भ्रष्टाचार की नाव पर सवार होकर पंचायत चलाने वालों के लिए अब सिविल जेल के दरवाजे खुले हैं।
जनता के पैसे से पंचायत करने वालों का अब पंचनामा
जिले में चर्चा है कि ये वही सरपंच हैं जो चुनाव के समय हाथ जोडक़र विकास की गंगा बहाने का वादा करते थे, लेकिन कुर्सी मिलते ही गंगा को अपनी तिजोरी की ओर मोड़ दिया। अब जब डंडा चला है, तो कई माननीयों के पसीने छूट रहे हैं। सीईओ की इस कार्रवाई से जिले के गलियारों में हडक़ंप है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी पैसा कोई प्रसाद नहीं है जिसे खाकर डकार न ली जाए।
जेल जाने को तैयार रहें भ्रष्टाचारी
प्रशासनिक गलियारों से खबर है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर समय सीमा में वसूली नहीं हुई, तो सिविल जेल भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है। 15 दिन का समय इन सरपंचों के लिए अग्निपरीक्षा जैसा है। अब देखना यह होगा कि ये सरपंच अपनी साख बचाते हैं या फिर भ्रष्टाचार की कालिख लेकर राजनीति से सन्यास लेते हैं।