अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई: मौतों का ‘टर्मिनल’ बना रेलवे ट्रैक
, 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत ने खोली प्रबंधन और एम.के. ट्रेडर्स की पोल
चचाई पावर प्लांट या ‘यमराज’ का अड्डा?
पं अजय मिश्र
अनूपपुर (चचाई)। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) चचाई के भीतर कोयला परिवहन और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कोयला परिवहन के कार्य में लगी फर्म ‘एम.के. ट्रेडर्स’ के एक कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने थर्मल पावर प्लांट के भीतर चल रहे नियमों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार की परतों को उधेड़ कर रख दिया है।
80 साल की उम्र और लोको संचालन: मौत का जिम्मेदार कौन?
ताजा मामला एम.के. ट्रेडर्स के कर्मचारी एच.आर. टाटे उर्फ हीरा (पिता दादू जी, उम्र 80 वर्ष) का है। जानकारी के अनुसार, चचाई निवासी हीरा टाटे कोयला परिवहन के दौरान लोको पायलट के रूप में कार्य कर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस उम्र में केंद्र और राज्य सरकारें कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर आराम की सलाह देती हैं, उस 80 वर्ष की उम्र में पावर जनरेटिंग कंपनी के मुखिया और ठेकेदार ने उन्हें लोको पायलट जैसे जोखिम भरे काम पर किस आधार पर रखा? क्या थर्मल पावर प्लांट के भीतर गेट पास बनाने के लिए उम्र और फिटनेस का कोई पैमाना नहीं बचा है?
प्रबंधन की ‘मेहरबानी’ और प्रायरिटी फंड का खेल
सूत्रों की मानें तो चचाई पावर प्लांट के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) तनवीर अहमद की भूमिका इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में है। आरोप है कि प्रबंधन द्वारा ‘एम.के. ट्रेडर्स’ पर विशेष कृपा बरसाई जा रही है।
फंड का दुरुपयोग: चर्चा है कि ‘प्रायरिटी फंड’ (Priority Fund) जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों को मुख्य अभियंता द्वारा एम.के. ट्रेडर्स को लाभ पहुँचाने के लिए नियम विरुद्ध तरीके से उपयोग किया गया है।
पुराना इतिहास: यह पहली बार नहीं है जब एम.के. ट्रेडर्स विवादों में है। इससे पूर्व भी एक लोको पायलट की मौत पर इस फर्म पर 50 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी। बावजूद इसके, सुरक्षा मानकों में सुधार के बजाय बुजुर्गों से काम कराकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है।
पुलिस और कानून से दूरी: एफआईआर पर सन्नाटा
चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद अब तक पुलिस के पास इस मामले की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं पहुँची है। अस्पताल में मौत और प्लांट के भीतर घटित घटना के बाद भी एफआईआर दर्ज न होना प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठाता है। क्या मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है? लगातार हो रही लोको पायलट्स की मौतें यह दर्शाती हैं कि यहाँ मजदूरों की जान की कीमत कागजी बिलों से भी कम है।
इन सुलगते सवालों के जवाब कौन देगा?
गेट पास का रहस्य: 80 वर्षीय व्यक्ति का गेट पास आखिर किस अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी हुआ? क्या मेडिकल फिटनेस की जांच हुई थी?
नियमों की अनदेखी: रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुके व्यक्तियों को तकनीकी और भारी मशीनरी के काम में लगाना क्या श्रम कानूनों का उल्लंघन नहीं है?
मुख्य अभियंता की चुप्पी: एम.के. ट्रेडर्स पर बार-बार लग रहे आरोपों और मौतों के बावजूद उन्हें ‘प्रायरिटी फंड’ और काम का ठेका क्यों दिया जा रहा है?
लापरवाही नहीं, यह ‘हत्या’ है!
लगातार हो रही लोको पायलट्स की मौतें कोई इत्तेफाक नहीं हैं। यह प्रबंधन की घोर लापरवाही और ठेकेदार की लालच का नतीजा है। 80 साल के बुजुर्ग की मौत के लिए क्या सीधे तौर पर पावर प्लांट के प्रबंधन को जिम्मेदार मानकर उन पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज नहीं होना चाहिए?”क्या सरकारी खजाने और ठेकेदारी की मलाई के लिए अब बुजुर्गों की बलि दी जाएगी?”
चचाई पावर प्लांट के भीतर का रेलवे ट्रैक अब हादसों का ट्रैक बनता जा रहा है। यदि उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो भ्रष्टाचार और लापरवाही की यह भेंट और भी मासूम जिंदगियां चढ़ सकती हैं। स्थानीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।






