चिकलोडा पंचायत घोटाला: शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य, आखिर किसके संरक्षण में सचिव

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जनपद सीईओ पर सवालों की बौछार, जिला प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा जनाक्रोश

देपालपुर। संदीप सेन।।जनपद पंचायत देपालपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत चिकलोडा में पदस्थ सचिव जसवंतसिंह यादव पर लगे गंभीर आरोप अब केवल स्थानीय असंतोष तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सरकार की विश्वसनीयता की कसौटी बन गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर कथित टैक्स घपले, अनियमित उपस्थिति, ग्राम सभा की अवहेलना और योजनाओं में लापरवाही जैसे आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे प्रश्न खड़े कर रहा है। ग्रामीणों और सरपंच अंतरसिंह गेहलोत के अनुसार 24 जनवरी 2026 को आयोजित ग्राम सभा के दिन पंचायत सचिव कार्यालय में मौजूद नहीं थे। ग्राम सभा, जो लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है, उसी दिन पंचायत भवन पर दोपहर लगभग 12:30 बजे तक ताले लटके रहना प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बताया जा रहा है। सवाल यह है कि जब ग्राम सभा जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के दिन सचिव अनुपस्थित पाए जाते हैं तो सामान्य दिनों में स्थिति कैसी रहती होगी? सबसे गंभीर आरोप टैक्स वसूली को लेकर सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनसे ₹3500 तक की राशि वसूली गई, जबकि रसीद मात्र ₹500 की दी गई। शेष राशि का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। यदि यह आरोप सही सिद्ध होते हैं तो यह सीधा आर्थिक अनियमितता और शासकीय धन के दुरुपयोग का मामला बनता है। ऐसे में तत्काल वित्तीय ऑडिट और लेखा परीक्षण की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शासकीय योजनाओं के आवेदन और दस्तावेज पंचायत मुख्यालय में तैयार करने के बजाय सचिव उन्हें अपने गांव झलरिया बुलाते हैं। यह व्यवस्था न केवल नियमों के विपरीत है बल्कि आमजन को अनावश्यक असुविधा में डालने वाली है। सरपंच अंतरसिंह गेहलोत ने सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि सचिव की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं है और ठहराव प्रस्ताव तक समय पर तैयार नहीं किए जाते। मामला तब और गंभीर हो गया जब जनपद पंचायत की सीईओ पूजा मालाकार सैनी पर भी कथित रूप से संरक्षण देने के आरोप लगे। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें दिए जाने के बावजूद सचिव के विरुद्ध न तो जांच प्रारंभ हुई और न ही कोई निलंबन या कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इससे यह धारणा बल पकड़ रही है कि जनपद स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि पंचायत स्तर पर अनियमितताओं के दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो जिला स्तर पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन केवल शिकायतों के ढेर का इंतजार कर रहा है या फिर किसी दबाव में मौन साधे हुए है? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता का दावा करती है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल भी पंचायत व्यवस्था में सुधार की बात करते रहे हैं। किंतु चिकलोडा प्रकरण में जमीनी हकीकत इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। यदि निचले स्तर पर इस प्रकार की शिकायतें अनसुनी रह जाएं तो यह शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इधर, इंदौर कलेक्टर द्वारा अन्य मामलों में त्वरित निराकरण के उदाहरण दिए जाते रहे हैं, लेकिन चिकलोडा मामले में अब तक स्पष्ट और सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में यह संदेश जा रहा है कि प्रशासनिक तंत्र शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा।

ग्रामीणों और सरपंच ने स्पष्ट मांग रखी है कि—

▪️पंचायत सचिव जसवंतसिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

▪️टैक्स वसूली की संपूर्ण वित्तीय जांच एवं विशेष ऑडिट कराया जाए।

▪️ग्राम सभा और उपस्थिति रजिस्टर की तकनीकी जांच की जाए।

▪️जनपद स्तर पर शिकायतों के निस्तारण की पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो वे सामूहिक आंदोलन का मार्ग अपनाएंगे। यह प्रकरण केवल एक सचिव या एक पंचायत का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही की व्यापक परीक्षा है। आरोपों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस मामले में सच्चाई सामने ला सकती है। फिलहाल, प्रशासन की चुप्पी सवालों को और गहरा रही है, और जनता जवाब चाहती है।

सचिव का जवाब असंतोषजनक, जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत को भेजा जाएगा

इस संबंध में जनपद पंचायत देपालपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा मालाकार सैनी ने स्पष्ट किया कि “पंचायत सचिव द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया है। प्राप्त शिकायतों एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के उपरांत विस्तृत जांच प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है, जिसे नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही हेतु जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन को प्रेषित किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि प्रकरण में समस्त बिंदुओं—उपस्थिति, वित्तीय लेन-देन एवं ग्राम सभा से संबंधित तथ्यों—का परीक्षण किया जा रहा है तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।