देपालपुर। संदीप सेन। कृषि प्रधान देश कहे जाने वाले भारत में किसानों की पीड़ा थमने का नाम नहीं ले रही। इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के ग्राम जलोदियापार के कृषक राकेश पिता अमर सिंह गायरी पिछले करीब दो माह से अपने खेत की जमीन को बैंक में बंधक चढ़ाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन लापरवाह तंत्र और अधिकारियों की ढिलाई ने उन्हें भटकने पर मजबूर कर दिया है।
पोर्टल पर ‘विचाराधीन’ ही अटका मामला
27 जून 2025 को किसान राकेश ने अपनी जमीन का सर्वे नंबर 42/8/1, हल्का 95, ग्राम जलोदियापार बंधक प्रक्रिया के लिए आइसीआइसीआइ बैंक देपालपुर में प्रस्तुत किया। पटवारी ने तीन माह पहले ही बंधक चढ़ाने की कार्यवाही पूरी कर दी और तहसील कार्यालय को अग्रेषित कर दिया। लेकिन आज तक पोर्टल पर यह प्रकरण केवल “विचाराधीन” ही दिख रहा है।
दो-दो तहसीलदार, फिर भी समाधान शून्य
मामले की जानकारी लेने पर किसान ने देपालपुर तहसीलदार धर्मेन्द्र चौकसे और गौतमपुरा नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह से संपर्क किया। दोनों ही अधिकारियों का एक जैसा जवाब रहा—“हम अभी नए आए हैं, सोमवार को दिखवा लेंगे।” हैरानी की बात यह है कि किसान की भूमि न तो देपालपुर तहसील पोर्टल पर ओपन हो रही है और न ही गौतमपुरा तहसील टप्पा में। परिणाम यह कि दो-दो तहसीलदार होने के बावजूद किसान आज भी समाधान से वंचित है।
किसानों की मेहनत पर प्रशासन की नाकामी
जब हल्का पटवारी ने बार-बार बंधक की रिक्वेस्ट अग्रेषित कर दी, तब भी तहसील स्तर पर मामले को गंभीरता से न लेना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। किसान का कहना है कि बैंक से दोबारा भी रिक्वेस्ट भेजी गई, लेकिन पोर्टल की खामी और अधिकारियों की ढिलाई के चलते सर्वे नंबर अब भी ‘ओपन’ नहीं हो रहा।
जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी क्यों?
प्रदेश के उच्च पदस्थ अधिकारी कलेक्टर आशीष सिंह और अपर कलेक्टर गौरव बैनल भी इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पाए हैं। किसान पूछ रहा है—
“जब सरकार किसान हितैषी योजनाओं की बात करती है तो फिर अधिकारियों की लापरवाही पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?”
किसानों का धैर्य टूट रहा
गांव जलोदियापार का यह प्रकरण इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक सामान्य किसान अपनी जमीन बंधक कर ऋण लेने के लिए महीनों से दर-दर भटक रहा है। यह सीधे तौर पर सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार के अधीन काम करने वाले अफसर किसानों की समस्या सुलझाने आए हैं या किसानों को और परेशान करने के लिए?
इनका कहना है।
“मैं अभी नया आया हूं। सोमवार को दिखवा लेते हैं क्या कारण है।”
धर्मेन्द्र चौकसे, तहसीलदार देपालपुर
सोमवार को पता करवाता हूं कि किस कारण पोर्टल पर जलोदियापार गांव ओपन नहीं हो रहा है।”
कुलदीप सिंह, नायब तहसीलदार गौतमपुरा