रामपुर: जै अम्बे प्राइवेट लिमिटेड पर कर्मचारियों के शोषण का आरोप, गुस्साए ड्राइवरों ने किया चक्का जाम

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जै अम्बे प्राइवेट लिमिटेड पर कर्मचारियों के शोषण का आरोप, गुस्साए ड्राइवरों ने किया चक्का जाम

12 घंटे का अल्टीमेटम देकर समस्याओं के समाधान की मांग

रामपुर बटुरा। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कार्यरत जै अम्बे प्राइवेट लिमिटेड को लेकर कर्मचारियों और वाहन चालकों में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। कर्मचारियों के कथित शोषण और भुगतान सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर गुस्साए ड्राइवरों ने चक्का जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को कंपनी प्रबंधन के समक्ष रखा जा रहा है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

चक्का जाम के दौरान ड्राइवरों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी विभिन्न मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की। उनका आरोप है कि काम के अनुरूप उन्हें उचित भुगतान, समय पर मजदूरी तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती जा रही है। ड्राइवरों का कहना है कि लगातार काम करने के बावजूद यदि उनकी मेहनत का उचित सम्मान और भुगतान नहीं मिलता है, तो उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन को 12 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जा सकता है। ड्राइवरों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जायज मांगों और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।

चक्का जाम की सूचना मिलने के बाद परियोजना क्षेत्र में कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बनी। आंदोलन के कारण वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा। कर्मचारियों और ड्राइवरों ने मांग की कि कंपनी प्रबंधन मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुने और लिखित रूप से समाधान का भरोसा दे।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में स्थानीय कर्मचारियों और वाहन चालकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उनके भुगतान, काम की परिस्थितियों और अन्य समस्याओं का समय पर समाधान होना आवश्यक है, ताकि परियोजना का काम सुचारु रूप से चलता रहे और विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

ड्राइवरों ने चेतावनी दी कि यदि 12 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे। हालांकि, कंपनी प्रबंधन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। कर्मचारियों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।

अब सभी की नजर कंपनी प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकलता है तो परियोजना में कामकाज सामान्य हो सकता है, लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।