उमरिया में गौरव दिवस के बीच झुग्गी बस्तियों की बदहाली ने खोली विकास की पोल
उमरिया। बृजेश श्रीवास्तव। नगर पालिका के 107 वर्ष पूर्ण होने पर जहां नगर में गौरव दिवस मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर नगर की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की बदहाल जिंदगी ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। नगर के विभिन्न वार्डों में रहने वाले गरीब परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में इन बस्तियों की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।
झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों के बच्चे गंदगी और कीचड़ से भरी सड़कों के बीच खेलने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर न तो उचित सड़क है और न ही जल निकासी की व्यवस्था। बारिश के दौरान झोपड़ियों में पानी भरने और परिवारों को परेशानियों का सामना करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। नगर की बस्तियों में रिपोर्टिंग के दौरान महिलाओं ने अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत पत्र जरूर दिए गए हैं लेकिन हमारे खाते में अभी तक पैसा नहीं आया है नहीं झुग्गी झोपड़ी का पट्टा मिला है
सरकार द्वारा झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को जमीन का पट्टा देने की घोषणा की गई थी। इसके लिए सर्वे की प्रक्रिया भी पूरी की गई, लेकिन उमरिया में पात्र लोगों को अब तक पट्टे का वितरण नहीं हो सका है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई परिवारों को आवास स्वीकृति पत्र जरूर दिए गए हैं। लेकिन स्वीकृति पत्र मिलने के करीब दो महीने बाद भी हितग्राहियों के खातों में राशि नहीं पहुंची है।
इस मामले में नगर पालिका के सीएमओ का कहना है कि जमीन का पट्टा मिलने के बाद ही आवास योजना की राशि हितग्राहियों के खातों में पहुंच पाएगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब पट्टा देने के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो आखिर पात्र परिवारों को अब तक पट्टे क्यों नहीं दिए गए?
एक ओर नगर पालिका अपने 107 वर्ष पूरे होने का गौरव दिवस मना रही है, तो दूसरी ओर उसी नगर के गरीब परिवार बुनियादी सुविधाओं और पक्के आशियाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में गौरव दिवस के जश्न के बीच झुग्गी बस्तियों की तस्वीर नगर पालिका की कार्यप्रणाली और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।








