क्या खाकी और खादी की खामोशी के बीच बिकेगा मोनू यादव का न्याय ?

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11 केवी लाइन हादसे में मजदूर की मौत: सुरक्षा में सेंध के बाद अब दलालों का ‘सिंडिकेट’ सक्रिय, 
अनूपपुर। अब कानून की चौखट पर गरीब के खून का मोल लगने लगे और खाकी व खादी की खामोशी के बीच दलालों की मेज सजने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि इंसाफ की हत्या केवल हादसे से नहीं, बल्कि व्यवस्था की नियत से हुई है। कोतमा के वार्ड क्रमांक 4 में 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर 75 फीसदी झुलसे ग्राम बरगवां निवासी 26 वर्षीय युवा मजदूर मोनू यादव की रायपुर में हुई मौत ने जहां पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है, वहीं दूसरी ओर अब शहर का एक ‘सफेदपोश सिंडिकेट’ इस आपराधिक लापरवाही को पैसों के दम पर दबाने की साजिश में जुट गया है।
हैरत और आक्रोश की बात यह है कि एक तरफ मृतक का परिवार अपने बेकसूर बेटे की लाश पर आंसू बहा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर एक चर्चित होटल संचालक की अगुवाई में दलालों का जमघट थाने से लेकर ठेकेदार के दफ्तर तक चक्कर काट रहा है ताकि इस मामले में राजीनामा कराया जा सके। यह खबर केवल एक दुर्घटना का विवरण नहीं, बल्कि उस कड़वे सच का पर्दाफाश है जहां गरीबों की जिंदगी की कीमत चंद रुपयों के प्रलोभन से तय करने की कोशिश की जा रही है और पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे तमाशा देख रहा है।

28 जुलाई का वह खौफनाक हादसा और इलाज के दौरान मौत
प्राप्त जानकारी और थाने में दर्ज शिकायत पत्र के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को ग्राम बरगवां निवासी 26 वर्षीय मोनू यादव को मकान मालिक सुरेंद्र पांडे अपने साथ कोतमा स्थित वार्ड क्रमांक 4 में सरस्वती स्कूल के पीछे निर्माणाधीन मकान पर ले गए थे। वहां काम करने के दौरान 11,000 वोल्ट (11 केवी) की हाईटेंशन विद्युत लाइन के संपर्क में आने से मोनू गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद उसे प्राथमिक इलाज के लिए कोतमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज शहडोल और फिर रायपुर रेफर किया गया, जहां 5 अगस्त 2026 की दोपहर लगभग 12:00 बजे उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कराया जा रहा था काम
मोनू यादव की इस दर्दनाक मौत की मुख्य वजह निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से शून्य होना बताया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि सुरेंद्र पांडे द्वारा मोनू से बेहद जोखिमपूर्ण वातावरण में विद्युत संबंधी कार्य करवाया जा रहा था। मजदूर को न तो ग्लव्स दिए गए थे और न ही हाईटेंशन लाइन से बचाव के लिए कोई सुरक्षा उपकरण या बैरिकेडिंग उपलब्ध कराई गई थी। चंद रुपयों का लालच और मकान मालिक व ठेकेदार की यह आपराधिक लापरवाही सीधे तौर पर एक बेकसूर की मौत का कारण बनी।

पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा शव, मातम में बदला माहौल
रायपुर में इलाज के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद 6 अगस्त को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और शव को पैतृक गांव बरगवां लाया गया। जैसे ही 26 वर्षीय मोनू का पार्थिव शरीर उसके घर पहुंचा, परिजनों के करुण क्रंदन से पूरा गांव दहल उठा। परिजनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद भी संबंधित व्यक्ति द्वारा न तो इलाज में अपेक्षित सहयोग दिया गया और न ही कोई सुध ली गई। गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच हर ग्रामीण के दिल में दोषियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया।

मामले को दबाने के लिए सक्रिय हुआ ‘होटल संचालक’ और दलालों का सिंडिकेट
मोनू की मौत की पुष्टि होते ही कोतमा शहर में पर्दे के पीछे काम करने वाले दलालों का सिंडिकेट तुरंत हरकत में आ गया। सूत्रों का कहना है कि शहर का एक चर्चित होटल संचालक ठेकेदार और मकान मालिक को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। होटल में बाकायदा बैठकों का दौर चल रहा है, जहां पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने, पैसे फेंककर मामला रफा-दफा करने और पुलिस शिकायत वापस लेने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

थाने में लिखित शिकायत, खाकी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
मृतक के छोटे भाई दीपक यादव (पुत्र छद्दू यादव) द्वारा कोतमा थाना प्रभारी को सौंपी गई लिखित शिकायत में स्पष्ट मांग की गई है कि सुरेंद्र पांडे और संबंधित दोषियों के खिलाफ भादंवि की सुसंगत धाराओं (जैसे गैर-इरादतन हत्या) के तहत FIR दर्ज की जाए। शिकायत पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि परिवार पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाकर समझौता कराने का प्रयास न किया जाए तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए। हालांकि, शिकायत मिलने के बाद भी दलालों का पुलिस की नाक के नीचे खुलेआम घूमना पुलिस प्रशासन की नीयत पर सवालिया निशान लगाता है।

निर्माणाधीन स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा भगवान भरोसे
यह घटना कोतमा और आसपास के क्षेत्रों में बिना किसी सुरक्षा एनओसी के चल रहे निर्माण कार्यों का पर्दाफाश करती है। श्रम विभाग और विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण आज ठेकेदार बेखौफ होकर मजदूरों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हाईटेंशन लाइनों के ठीक नीचे सुरक्षा जाली या उपकरण के बिना काम कराना आम बात बन चुकी है, और जब कोई मजदूर इसका शिकार बनता है, तो तंत्र दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती में जुट जाता है।

परिजन इंसाफ पर अडिग: ‘हम झुकेंगे नहीं, दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे’
दलालों और सफेदपोशों के तमाम हथकंडों, प्रलोभनों और दबाव के बावजूद मृतक मोनू यादव का परिवार इंसाफ के लिए अडिग खड़ा है। परिजनों का साफ कहना है कि वे किसी भी तरह की दलाली या समझौते के झांसे में नहीं आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपने 26 साल के बेटे/भाई के न्याय के लिए अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे और जब तक मकान मालिक सुरेंद्र पांडे तथा दोषी ठेकेदार को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, यह कानूनी जंग जारी रहेगी।

प्रशासन की निष्पक्षता का परीक्षण: क्या मिलेगी सजा या दबेगी फाइल?
अब नजरें कोतमा पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाते हुए निष्पक्ष जांच करेगी या फिर इन दलालों के सिंडिकेट के आगे नतमस्तक हो जाएगी। पुलिस को चाहिए कि वह अस्पताल के एम एल सी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटना स्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और बिजली विभाग से रिकॉर्ड प्राप्त कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में किसी और गरीब मजदूर की जिंदगी दलालों की टेबल पर नीलाम न हो सके।