चुनावी दरों को दरकिनार कर चहेते वेंडरों को किया गया लाखों का अनियमित भुगतान, कटघरे में अनूपपुर जनपद सीईओ
अनूपपुर।जनपद पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत आयोजित ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना 2025-26’ में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और गंभीर भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और कार्यक्रम के नाम पर जारी बिलों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के पवित्र आयोजन की आड़ में शासकीय धन का जमकर बंदरबांट किया गया है। टेंडर प्रक्रिया और भुगतानों में सबसे गंभीर गड़बड़ी यह पाई गई है कि प्रशासन ने पूर्व में निर्धारित ‘विधानसभा निर्वाचन 2023’ की स्वीकृत कलेक्टर दरों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया और चहेते वेंडरों को मनमाने ढंग से कई गुना अधिक दरों पर भुगतानों की मंजूरी दे दी। इस खुली लूट ने अनूपपुर जनपद के प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
. चुनावी टेंडर दरों की जानबूझकर अनदेखी और वेंडरों पर विशेष मेहरबानी
जांच में यह बात सामने आई है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए टेंट, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए कोटेशन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें स्पष्ट निर्देश थे कि कार्य कलेक्टर दर पर किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, भुगतान के समय नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया। विधानसभा निर्वाचन 2023 के दौरान जो दरें निविदा के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा तय की गई थीं, उन्हें इस आयोजन में पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। जनपद पंचायत ने जानबूझकर स्वीकृत दरों की उपेक्षा की ताकि खास वेंडरों को अनुचित रूप से वित्तीय लाभ पहुँचाया जा सके, जो सीधे तौर पर एक सुनियोजित वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है।
. सोफा से लेकर पाइप पंडाल तक: हर सामान में की गई भारी ओवर-बिलिंग
सामूहिक विवाह कार्यक्रम के जो बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए हैं, उनमें प्रत्येक सामग्री का मूल्यांकन बाजार और तय नियमों से कई गुना अधिक किया गया है। स्वीकृत टेंडर रेट के अनुसार, चुनावी व्यवस्थाओं में पाइप पंडाल की स्वीकृत दर मात्र 4/- रुपये प्रति नग तय थी, जबकि इस आयोजन के बिलों में पाइप पंडालों का मूल्यांकन बेहद संदिग्ध और ऊंची दरों पर किया गया है। इससे भी बड़ा खुलासा यह हुआ है कि विधानसभा निर्वाचन 2023 की आधिकारिक सूची में जो ‘VIP सोफा’ शामिल ही नहीं था, उसे भी नियमों के विरुद्ध जाकर इस सूची में शामिल किया गया और ₹200/- प्रति नग की भारी-भरकम दर से उसका अवैध भुगतान स्वीकृत कराया गया।
कारपेट और गद्दों के बिल में हेराफेरी: आंकड़ों की बाजीगरी का खुला खेल
सामान की आपूर्ति और बिलों के योग में केवल दरों का ही अंतर नहीं है, बल्कि गणितीय आंकड़ों की बाजीगरी करके भी हेरफेर की गई है। प्राप्त हस्तलिखित देयक के अनुसार, कारपेट की दर 3/- रुपये प्रति नग दर्शाई गई है। नियमानुसार, 270 नग कारपेट का कुल योग 810/- रुपये होना चाहिए था, लेकिन बिल तैयार करने वालों ने चालाकी दिखाते हुए इसे सीधे 710/- रुपये दर्ज कर दिया। इसी प्रकार, गद्दों के लिए 12/- रुपये प्रति नग की दर से 200 नग का कुल 2400/- रुपये का बिल बनाया गया है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से प्रमाणित करते हैं कि बिलों का कोई भौतिक या तकनीकी सत्यापन नहीं किया गया और सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए बिना जांचे सीधे देयकों को हरी झंडी दे दी गई।
माइक, जनरेटर और लाइट के संयुक्त बिल में छिपा भ्रष्टाचार का बड़ा गठजोड़
घोटाले की जड़ें साउंड और पावर बैकअप व्यवस्था में और भी गहरी पाई गई हैं। विधानसभा निर्वाचन 2023 की कलेक्टर गाइडलाइन और टेंडर शर्तों के अनुसार, माइक सेट, जनरेटर और लाइट व्यवस्था को ‘एक पैसे’ यानी एकमुश्त न्यूनतम संयुक्त दर पर संयोजित किया जाना तय था। परंतु, जनपद पंचायत अनूपपुर के इस आयोजन में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इन सभी सेवाओं को या तो पृथक मदों में दर्शाया गया या फिर मनमाने तरीके से एक बड़ा बिल बनाकर आहरित कर लिया गया। इस प्रकार की हेराफेरी से स्पष्ट है कि प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच पर्दे के पीछे गहरा गठजोड़ काम कर रहा था।
डोम पंडाल का खेल: दरें आधी करने के बावजूद लगाया गया लाखों का चूना
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खेल ‘डोम पंडाल’ और उसकी लाइटिंग व्यवस्था के नाम पर खेला गया। प्राप्त विवरण के अनुसार, डोम पंडाल की जो दर पहले 20 रुपये तय थी, उसे बाद में संशोधित कर 10 रुपये किया गया था। इस आधार पर डोम लाइट सेट का कुल मूल्यांकन 90,000/- रुपये (9,000 वर्ग फुट हेतु 10/- रुपये की दर से) दर्शाया गया है, जबकि वास्तविक नियमानुसार इसमें केवल 12/- रुपये की मूल दर का ही औचित्य बनता था। इस मद में सीधे तौर पर 90,000/- रुपये का एकमुश्त संदिग्ध भुगतान जोड़कर कुल बिल को ₹1,08,970/- तक पहुँचा दिया गया, जो पूरी तरह से अवैध है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीधे तौर पर कठघरे में: क्यों नहीं देखे टेंडर रेट?
इस पूरे घोटाले और वित्तीय अनियमितता की सीधी आंच जनपद पंचायत अनूपपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पर आती है। एक जिम्मेदार आहरण-संवितरण अधिकारी होने के नाते, यह सीईओ की प्राथमिक और विधिक जिम्मेदारी थी कि वे किसी भी कोटेशन या बिल को पास करने से पहले ‘विधानसभा निर्वाचन 2023’ की स्वीकृत दरों से उसका मिलान करते। आखिर सीईओ ने आँखें मूंदकर इस प्रकार की भारी गड़बड़ियों वाले देयकों पर हस्ताक्षर कैसे कर दिए? क्या प्रशासनिक अमले की नाक के नीचे चल रहे इस खेल की उन्हें भनक नहीं थी, या फिर वे स्वयं इस पूरे तंत्र को मूक संरक्षण दे रहे थे? सीईओ की यह संदिग्ध चुप्पी और घोर लापरवाही उन्हें इस घोटाले के मुख्य आरोपियों के समकक्ष खड़ा करती है।
. मीडिया में लगातार छप रही थीं खबरें, फिर भी कुंभकर्णी नींद में सोया रहा प्रशासन
अनूपपुर जनपद के सीईओ और प्रशासनिक अमले की भूमिका इसलिए भी सबसे अधिक संदेहास्पद हो जाती है क्योंकि क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों में विधानसभा निर्वाचन के दौरान टेंट और अन्य व्यवस्थाओं में हुए भ्रष्टाचार की खबरें लगातार प्रमुखता से प्रकाशित हो रही थीं। जब चुनावी भुगतानों और टेंडरों को लेकर मीडिया पहले से ही प्रशासन को आगाह कर रहा था, तब अनूपपुर जनपद सीईओ ने इन गंभीर चेतावनियों को पूरी तरह से नजरअंदाज क्यों किया? मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद किसी प्रकार की समीक्षा न करना और बिना किसी उच्चस्तरीय जांच के सीधे चहेते वेंडरों के खातों में शासकीय राशि ट्रांसफर करने की तैयारी करना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत ऊपर तक जुड़ी हुई हैं।
जनपद पंचायत अनूपपुर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसी जनहितैषी योजना के नाम पर किस बेरहमी से सरकारी धन की लूट मचाई गई थी। अब देखना यह है कि जिला कलेक्टर और राज्य शासन इस स्पष्ट भ्रष्टाचार पर जनपद सीईओ और दोषी वेंडरों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं।








