अनूपपुर में गूँजे वैदिक मंत्र: 40 बटुकों का हुआ सामूहिक जनेऊ संस्कार,

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

भव्य शोभायात्रा ने मोहा नगरवासियों का मन

अनूपपुर। धर्मनगरी अनूपपुर में कल का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन परंपरा के गौरव का साक्षी बना। स्थानीय आशीर्वाद मैरिज गार्डन में ब्राह्मण समाज सेवा समिति द्वारा आयोजित सामूहिक उपनयन (जनेऊ) संस्कार कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मर्यादाओं के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामयी आयोजन में जिले के लगभग 40 बटुकों ने विधि-विधान से जनेऊ धारण कर अपने नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की।
वैदिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ पूजन
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः काल से ही विद्वान आचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। पवित्र यज्ञ वेदी के समक्ष बैठकर बटुकों ने गुरु दीक्षा प्राप्त की। आचार्यों ने बटुकों को जनेऊ धारण करने के महत्व, इसके नियमों और ब्रह्मचर्य धर्म के पालन की विस्तृत जानकारी दी। जनेऊ संस्कार के दौरान होने वाली हर रस्म—चाहे वह मुंडन हो, भिक्षाटन हो या हवन—अत्यंत सूक्ष्मता और परंपरा के अनुरूप पूर्ण की गई।


आशीर्वाद गार्डन में उमड़ा जनसैलाब
आशीर्वाद मैरिज गार्डन का परिसर कल मानो लघु काशी के रूप में परिवर्तित हो गया था। श्वेत वस्त्र धारण किए बटुक और पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित ब्राह्मण जन समाज की एकता को प्रदर्शित कर रहे थे। आयोजन की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि सैकड़ों की संख्या में उपस्थित परिजनों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। हर तरफ शंखध्वनि और ‘जय परशुराम’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान रहा।
नगर में निकाली गई भव्य शोभायात्रा
संस्कार विधि पूर्ण होने के पश्चात नगर में एक विशाल और भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। बाजे-गाजे, आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते श्रद्धालु समाज की खुशियों को साझा कर रहे थे। सजे-धजे वाहनों और पारंपरिक वेशभूषा में नाचते-गाते युवाओं ने पूरे नगर का माहौल उत्सवमय बना दिया। नगरवासियों ने भी जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
मिति का प्रयास और सफल नेतृत्व
इस विशाल आयोजन की सफलता का मुख्य श्रेय ब्राह्मण समाज सेवा समिति के जिला अध्यक्ष आदरणीय पंडित रामप्रकाश द्विवेदी और उनकी कर्मठ टीम को जाता है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी द्विवेदी जी के कुशल नेतृत्व में समिति ने सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाई और उसे धरातल पर उतारा। समाज के प्रबुद्ध जनों ने समिति के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाज को नई दिशा देने वाला कदम बताया।
सनातन परंपरा और एकता का प्रतीक
यह आयोजन मात्र एक धार्मिक संस्कार नहीं था, बल्कि यह सनातन संस्कृति के संरक्षण और ब्राह्मण समाज की एकजुटता का एक जीवंत उदाहरण पेश कर रहा था। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में सामूहिक रूप से अपने संस्कारों को जीवित रखना और नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इस आयोजन ने सिद्ध कर दिया कि संगठित प्रयास से ही संस्कृति की रक्षा संभव है।
सहयोगियों का जताया गया आभार
आयोजन के समापन पर ब्राह्मण समाज सेवा समिति द्वारा उन सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। समिति ने विशेष रूप से दानदाताओं, समाजसेवी भाइयों, मातृशक्ति और विद्वान आचार्यों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की, जिनका समर्पण इस आयोजन को यादगार बनाने में सहायक रहा।
मातृशक्ति और युवाओं की सक्रिय भागीदारी
इस बार के आयोजन में मातृशक्ति (महिलाओं) और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। महिलाओं ने जहाँ मांगलिक गीतों और रीति-रिवाजों के प्रबंधन में भूमिका निभाई, वहीं युवाओं की टीम ने सुरक्षा, शोभायात्रा के प्रबंधन और अनुशासन को बनाए रखने में दिन-रात मेहनत की। यह अंतर-पीढ़ीगत सामंजस्य समाज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
सामाजिक समरसता और धर्म का संगम
नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी शोभायात्रा ने न केवल ब्राह्मण समाज बल्कि संपूर्ण अनूपपुर के जनमानस में धर्म के प्रति आस्था जगाई। लोगों ने इस आयोजन को सामाजिक समरसता का उदाहरण माना, जहाँ पूरा नगर एक ही आध्यात्मिक सूत्र में बंधा नजर आया। आतिशबाजी और संगीत ने इस धार्मिक अनुष्ठान को एक आनंदमयी उत्सव में बदल दिया।
भविष्य के लिए संकल्प
कार्यक्रम के अंत में ब्राह्मण समाज ने संकल्प लिया कि वे इसी प्रकार संगठित रहकर धर्म, संस्कृति और समाजहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहेंगे। प्रार्थना की गई कि भगवान परशुराम का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और समाज के हर वर्ग का कल्याण हो। इस सफल आयोजन की चर्चा आज पूरे जिले में जोरों पर है।
पूरा आयोजन जय परशुराम और जय सनातन धर्म के गगनभेदी उद्घोष के साथ संपन्न हुआ। विदाई के समय बटुकों के चेहरों पर एक नई चमक और परिजनों के मन में गौरव का भाव था। निश्चित ही, अनूपपुर का यह सामूहिक उपनयन संस्कार आने वाले कई वर्षों तक लोगों के स्मृति पटल पर अंकित रहेगा।