भारत आदिवासी पार्टी ने स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताओं को लेकर खोला मोर्चा

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल

अनूपपुर / जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर अब बड़े सवाल उठने लगे हैं। भारत आदिवासी पार्टी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कामकाज और नियुक्तियों में बरती जा रही कथित अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी की महिला प्रदेश उपाध्यक्ष अंकिता सिंह परस्ते ने एक औपचारिक ज्ञापन के माध्यम से विभागीय भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया है, जिससे क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल मच गई है।
यह मामला केवल एक विभाग का नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और नियुक्तियों में पारदर्शिता से जुड़ा है। पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों में नियुक्ति की शर्तों, आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान और पूर्व में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। इस ज्ञापन ने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है और जनहित में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

नियुक्ति और आरक्षण पर सवाल
ज्ञापन का मुख्य बिंदु वर्ष 2008 में राज्य प्रशासनिक सेवा में हुई एक नियुक्ति से संबंधित है। आरोप है कि वर्ष 2000 में शासन द्वारा अन्य राज्यों के निवासियों को आरक्षण का लाभ बंद कर दिया गया था, इसके बावजूद एक विशेष व्यक्ति को आरक्षण का लाभ देकर नियुक्ति दी गई, जो वर्तमान में सी.एच.सी. कोतमा में बी.एम.ओ. के पद पर कार्यरत हैं। पार्टी ने इसे स्थानीय आदिवासियों का अधिकार छीनना बताया है और संबंधित अधिकारी से उनके जाति, जन्म और निवास प्रमाण पत्र सार्वजनिक करने की मांग की है।

पूर्व पोस्टिंग के दौरान वित्तीय अनियमितताओं का आरोप
पत्र में बी.एम.ओ. की पूर्व पोस्टिंग के दौरान जैतहरी एवं शहडोल जिले के जयसिंह नगर में हुए कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया गया है। आरोप है कि उस समय वे वृक्षारोपण समिति के प्रभारी थे और वहां गरीबों के पैसों का गबन कागजों में हेराफेरी करके किया गया। यह मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ में लंबित है और उन पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। पार्टी ने इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई का पूरा विवरण साझा करने की मांग की है।

डेटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती में पारदर्शिता का अभाव
अनुपपुर कार्यालय में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा सी.ई.डी.एम.ए.पी. के अंतर्गत 450 डेटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती के विज्ञापन पर भी सवाल उठाए गए हैं। भारत आदिवासी पार्टी ने इस भर्ती प्रक्रिया पर संशय जताते हुए पूछा है कि वर्तमान में उनके कार्यालय में कितने चयनित कर्मचारी कार्यरत हैं। साथ ही, उन सभी की नियुक्ति आदेशों की प्रतियां भी मांगी गई हैं ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और भुगतान की स्थिति
एक अन्य गंभीर मुद्दा आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन से संबंधित है। ज्ञापन में पूछा गया है कि कलेक्टर दर पर रखे गए कर्मचारियों को किस मद से भुगतान किया जा रहा है और कितने महीनों का वेतन लंबित है। साथ ही, उन कर्मचारियों की सूची भी मांगी गई है जो वर्तमान में सी.एच.सी. कोतमा में तैनात हैं और उन्हें कब तक के वेतन का भुगतान किया गया है।

अनुबंध और वाहन उपयोग में अनियमितता
पार्टी ने सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है। ज्ञापन में उन वाहनों के नंबर, स्वामियों की जानकारी और किस अनुबंध के तहत इन वाहनों का उपयोग किया जा रहा है, इसकी विस्तृत जानकारी मांगी गई है। सवाल यह भी उठाया गया है कि इन वाहनों के भुगतान का क्या आधार है और क्या ये नियम के अनुसार निजी व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
भारत आदिवासी पार्टी के इन आरोपों ने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा किया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि यदि विभाग इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए। क्षेत्र के लोगों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस ज्ञापन का क्या संज्ञान लेता है और कब तक इन गंभीर आरोपों की जांच पूरी की जाती है।