अनूपपुर: जनजातीय आयोग का सख्त रुख, विकास कार्यों में लापरवाही पर उच्च स्तरीय जांच की मांग
पं अजय मिश्र
अनूपपुर: मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने अनूपपुर जिले में संचालित प्रमुख विकास कार्यों में हो रही अत्यधिक देरी और गंभीर अनियमितताओं को लेकर शासन और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखकर तीखी नाराजगी व्यक्त की है। आयोग ने इन परियोजनाओं की धीमी गति और गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसे न केवल जनहित के विरुद्ध, बल्कि सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह बताया है।
आयोग के अध्यक्ष द्वारा जारी इन पत्रों में अनूपपुर के रेलवे फ्लाईओवर निर्माण से लेकर ‘जल जीवन मिशन’ तक में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और सुस्ती को उजागर किया गया है। आयोग ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा, तकनीकी जांच और दोषी अधिकारियों व संविदाकारों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है, ताकि जनजातीय बाहुल्य इस जिले के विकास को गति मिल सके और स्थानीय निवासियों को राहत प्राप्त हो।
रेलवे फ्लाईओवर: 8 साल की देरी और जनता का संघर्ष
आयोग ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 में स्वीकृत अनूपपुर रेलवे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य आज तक पूर्ण न होना अत्यंत चिंताजनक है। आठ वर्षों की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी काम का कछुआ गति से चलना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। इस देरी के कारण स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और विशेष रूप से गंभीर मरीजों व गर्भवती महिलाओं को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल सुविधाओं की बदहाली पर कड़ा संज्ञान
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए आयोग ने उप मुख्यमंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) को पत्र लिखकर जिला अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट की बदहाली की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों और नर्सों के साथ-साथ जीवन रक्षक उपकरणों की कमी के कारण यहां के आदिवासियों को इलाज के लिए अन्य शहरों में भटकना पड़ता है। उन्होंने तत्काल निरीक्षण कर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना की पुरजोर मांग
जिले में बेहतर स्वास्थ्य शिक्षा और सेवाओं के अभाव को देखते हुए आयोग ने जिला मुख्यालय अनूपपुर में एक शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग की है। अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि यह कदम न केवल स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अवसर प्रदान कर रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा।
जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार की जांच की मांग
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में आयोग ने ‘जल जीवन मिशन’ के कार्यों में भारी अनियमितताओं का उल्लेख किया है। स्वयं क्षेत्र का दौरा करने के बाद आयोग ने पाया कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अनेक गांवों में लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। कहीं पाइपलाइन बिछने के बाद भी कनेक्शन नहीं हैं, तो कहीं निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन हैं। आयोग ने इसकी केंद्रीय एजेंसी से तकनीकी एवं वित्तीय जांच की मांग की है।
विद्युत आपूर्ति की समस्या से जनजीवन अस्त-व्यस्त
जैतहरी क्षेत्र में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर आयोग ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक को पत्र लिखा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अनियमित विद्युत आपूर्ति से न केवल दैनिक जनजीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा और कृषि कार्य भी बुरी तरह बाधित हो रहे हैं। आयोग ने तत्काल इस समस्या के स्थायी समाधान के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का दबाव
आयोग ने अपने पत्रों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि विकास कार्यों में देरी के लिए जिम्मेदार संबंधित विभागों और कार्यदायी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। केवल निर्माण कार्यों को पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता के मानकों का पालन न करने वाली एजेंसियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करना भी आवश्यक है।
आदिवासी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता
मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग अधिनियम 1995 की धाराओं के अंतर्गत प्राप्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का उपयोग करते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया है कि वे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जनहित से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे। आयोग ने शासन से अपेक्षा की है कि इन पत्रों में उठाए गए बिंदुओं पर त्वरित कार्यवाही करते हुए प्रभावितों को राहत प्रदान की जाएगी।
भविष्य की राह और उम्मीदें
आयोग के इस आक्रामक और सक्रिय रुख से जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। स्थानीय नागरिक अब उम्मीद कर रहे हैं कि आयोग के इस हस्तक्षेप के बाद लंबित फ्लाईओवर का काम जल्द पूरा होगा, अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरेंगी और सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली पर लगाम लगेगी। जनजातीय हितों के संरक्षण के लिए आयोग की यह पहल एक बड़ा कदम मानी जा रही है।








