जुगाड़ के ‘आशीर्वाद’ से पीटीआई बने पीएम श्री स्कूल के मुखिया, वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार कर संभाली कमान अनूपपुर

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जुगाड़ के ‘आशीर्वाद’ से पीटीआई बने पीएम श्री स्कूल के मुखिया, वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार कर संभाली कमान
अनूपपुर
शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत करने का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन जब यह खेल सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम श्री’ योजना के तहत आने वाले विद्यालयों में होने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पीएम श्री भेजरी से सामने आया है। यहाँ विगत कई वर्षों से एक पीटीआई (माध्यमिक शिक्षक, वर्ग-2) अरुण सिंह को प्रभारी प्राचार्य की कुर्सी सौंप दी गई है, जबकि इसी विद्यालय में उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) के वरिष्ठ शिक्षक राजकुमार साकेत पदस्थ हैं। नियमों के मुताबिक वरिष्ठ शिक्षक की मौजूदगी में किसी कनिष्ठ या खेल शिक्षक को संस्था प्रमुख का प्रभार नहीं दिया जा सकता, लेकिन यहाँ शासन-प्रशासन के कथित ‘विशेष आशीर्वाद’ के चलते नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

वरिष्ठता को ठेंगा: पीटीआई संभाल रहे कमान
नियमतः किसी भी शासकीय हाई या हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य का पद रिक्त होने पर वहाँ कार्यरत सबसे वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाता है। वर्ग-1 के शिक्षक का मूल वेतनमान और पद गरिमा वर्ग-2 के शिक्षक से काफी उच्च होती है। पीएम श्री विद्यालय भेजरी में वरिष्ठ शिक्षक राजकुमार साकेत जैसे योग्य अधिकारी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर वर्ग-2 के पीटीआई अरुण सिंह को मलाईदार कुर्सी पर बैठाया गया है। यह स्थिति शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर किस नियम के तहत एक खेल शिक्षक को पूरे स्कूल का प्रशासनिक मुखिया बना दिया गया?

. सुंदर परीक्षा परिणाम का ‘रहस्य’: कुर्सी बचाने के लिए इस बार बदला रिजल्ट!
चर्चाओं और सूत्रों की मानें तो विगत वर्षों में इस विद्यालय का बोर्ड कक्षाओं का परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक और चिंताजनक रहा था। लेकिन इस चालू शैक्षणिक वर्ष में अचानक विद्यालय का रिजल्ट ‘सुंदर’ और सर्वश्रेष्ठ परीक्षा परिणाम में तब्दील हो गया। गलियारों में यह चर्चा आम है कि साहब को अपनी प्रभारी प्राचार्य की कुर्सी हर हाल में सुरक्षित रखनी थी, इसलिए इस बार अति अथक प्रयास और विशेष रणनीतियों के तहत कागजों पर या धरातल पर सर्वश्रेष्ठ परिणाम लाकर दिखाया गया है ताकि उत्कृष्ट सेवा सम्मान का तमगा पहनकर कुर्सी को और मजबूत किया जा सके।

‘सावधान-विश्राम’ छोड़ ‘मलाई’ की राह: मूल पद से विमुख हुए खेल शिक्षक
एक पीटीआई (शारीरिक शिक्षक) का मूल काम मैदान पर रहकर विद्यार्थियों को खेलकूद, अनुशासन, योग और शारीरिक प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना होता है ताकि छात्र खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। लेकिन प्रभारी प्राचार्य की कुर्सी का रसूख और प्रशासनिक ‘मौज’ ऐसी है कि खेल शिक्षक अब मैदान के ‘सावधान-विश्राम’ को भूल चुके हैं। विद्यालय के छात्रों का खेल भविष्य दांव पर लगा है और पीटीआई महोदय मूल पद के कर्तव्यों को छोड़कर कार्यालय की वीआईपी कुर्सी का आनंद ले रहे हैं। आखिर मलाई का स्वाद किसे पसंद नहीं होता, और जब परिणाम भी पक्ष में आ जाए तो कुर्सी स्थायी मान ली जाती है।

विभिन्न मदों के खर्चों पर उठे सवाल: निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग
पीएम श्री योजना के अंतर्गत और राज्य सरकार द्वारा विद्यालय के विकास, अधोसंरचना और छात्र-कल्याण के लिए लाखों रुपये के विभिन्न वित्तीय मद प्रदान किए जाते हैं। प्रभारी प्राचार्य के कार्यकाल के दौरान इन राशियों को कहां और कैसे खर्च किया गया, इसे पूरी तरह से ‘व्यवस्थित’ दिखाने का दावा किया जाता है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मांग जोर पकड़ रही है कि यदि जिले या अन्य मदों से प्राप्त राशि की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो हकीकत कुछ और ही बयां करेगी। शासकीय धन के इस कथित व्यवस्थित खर्च के पीछे के वित्तीय दस्तावेजों की गहराई से स्क्रूटनी होना बेहद आवश्यक है।

अतिथि शिक्षक भर्ती में मनमानी: शिकायतों के बाद भी जांच शून्य
पीएम श्री भेजरी विद्यालय में अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी विवादों के घेरे में रही है। आरोप है कि शिक्षक बनने की चाह रखने वाले योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर, अतिथि भर्ती में पूरी तरह से मनमानी की राह अपनाई गई। इस संबंध में विगत दिनों में कई बार वरिष्ठ कार्यालयों में शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार रसूख और प्रशासनिक ‘आशीर्वाद’ के चलते जांच का नतीजा शून्य ही रहा। कार्रवाई न होना यह साफ दर्शाता है कि प्रभारी प्राचार्य के ऊपर व्यवस्था का हाथ कितना मजबूत है।

. नियमों को ताक पर रख ‘जुगाड़’ का खेल: कब तक चलेगी मर्जी?
विद्यालय में अरुण सिंह अपनी पूरी मर्जी और रसूख से व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं। किसी की हिम्मत नहीं होती कि उनके रहते प्रभार किसी दूसरे पात्र वरिष्ठ शिक्षक को सौंपने की बात भी कर सके। शासन-प्रशासन की योजनाओं का क्रियान्वयन करने में यह प्रभारी कभी पीछे नहीं हटते, क्योंकि उन्हें मालूम है कि ऊपर बैठे अधिकारियों को खुश रखकर ही यह कुर्सी पक्की रखी जा सकती है। अब देखना यह है कि नियमों को ताक पर रखकर खेला जा रहा प्रभारी का यह खेल और कितने समय तक चलता है, या फिर प्रशासन गहरी नींद से जागेगा।

रसगुल्ला मीठा है पर मधुमेह का खतरा: जिले भर में फैले हैं ऐसे ‘जुगाड़ू’ प्रभारी
यह समस्या सिर्फ पीएम श्री भेजरी विद्यालय तक सीमित नहीं है। पूरे अनूपपुर जिले में ऐसे न जाने कितने हाई और हायर सेकेंडरी विद्यालय हैं, जहां नियमों को दरकिनार कर कनिष्ठ शिक्षकों को ‘जुगाड़’ और सेटिंग के दम पर प्रभारी प्राचार्य बनाकर बैठाया गया है जो सालों से मलाई का स्वाद ले रहे हैं। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि रसगुल्ला भले ही मीठा हो, लेकिन अत्यधिक मिठाई से मधुमेह होने का खतरा बना रहता है; ठीक उसी तरह अत्यधिक भ्रष्टाचार और नियमविरुद्ध मलाई खाने से पूरी शिक्षा व्यवस्था बीमार हो चुकी है।

मुंगेरी लाल के हसीन सपने: निष्पक्ष जांच से ही खुलेगा इतिहास के पन्नों का राज
शिक्षा विभाग के ऐसे कई कारनामे इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं, जहां अपात्र लोग वर्तमान में मुंगेरी लाल के सपनों की तरह अपने रसूख के ख्वाबों को पूर्ण करने में लगे हैं। वरिष्ठों का हक मारकर कनिष्ठों को उपकृत करने की यह नीति योग्य शिक्षकों का मनोबल तोड़ती है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और छात्र संगठनों ने मांग की है कि छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए पीटीआई अरुण सिंह को तत्काल उनके मूल पद पर भेजकर खेल गतिविधियां शुरू कराई जाएं और उनके पूरे कार्यकाल के दौरान विभिन्न मदों से प्राप्त राशि व व्यय की निष्पक्ष व विस्तृत जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।