जानकारी देने में आनाकानी,खेल विभाग में 25 लाख के गबन की आशंका

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सहायक आयुक्त के आदेश को ठेंगे पर रख रहे प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी

अनूपपुर। जिले के जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत खेल विभाग में भ्रष्टाचार की परतें खुलने का डर अब अधिकारियों के व्यवहार में साफ दिखने लगा है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियों को प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी शेख खलील कुरैशी द्वारा कथित रूप से दबाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग के सहायक आयुक्त और प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्पष्ट लिखित आदेश के बावजूद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जो प्रशासनिक अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।
क्या है पूरा मामला?
पत्रकार द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दिनांक 18.11.2025 को एक आवेदन लगाया गया था। इसमें वर्ष 2021 से अब तक जिला क्रीड़ा अधिकारी द्वारा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर निकाली गई अग्रिम राशि उसके विरुद्ध प्रस्तुत किए गए देयकों और शेष बची राशि के समायोजन की प्रमाणित जानकारी मांगी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला लगभग 25 लाख रुपये के वित्तीय गबन से जुड़ा हो सकता है। आरोप है कि खेल आयोजनों के नाम पर भारी-भरकम राशि अग्रिम तो ली गई, लेकिन उसका सही हिसाब और समायोजन सरकारी फाइलों से नदारद है।
आदेश की अवहेलना: सुनवाई से भी नदारद रहे अधिकारी
जब निर्धारित समय सीमा में जानकारी नहीं मिली, तो मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी (सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग) के पास पहुँचा। कार्यालय कलेक्टर (जनजातीय कार्य विभाग) द्वारा जारी आदेश क्रमांक TRD/0620/2025-O/oTRBL-ANP-COLL के अनुसार, इस मामले में दिनांक 16.01.2026 को सुनवाई रखी गई थी।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि सुनवाई में जिला क्रीड़ा प्रभारी श्री कुरैशी अनुपस्थित रहे, जिस कारण इनका पक्ष नहीं सुना गया। वहीं आवेदक/अपीलार्थी उपस्थित रहे और अपना पक्ष रखते हुए साक्ष्य प्रस्तुत किए।”

7 दिवस की समय सीमा भी समाप्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं सहायक आयुक्त सरिता नायक ने दिनांक 10.02.2026 को डिजिटल हस्ताक्षरित आदेश पारित किया। इस आदेश में स्पष्ट निर्देशित किया गया था कि:
“जिला क्रीड़ा प्रभारी कुरैशी अपीलार्थी को उनके शाखा में संधारित जानकारी 07 दिवस में निःशुल्क उपलब्ध करावें।”
विभागीय आदेश के हफ़्तों बीत जाने के बाद भी क्रीड़ा अधिकारी मौन साधे बैठा है। जानकारी न देना इस बात की ओर प्रबल इशारा करता है कि विभाग के भीतर कुछ बड़ा छिपाने की कोशिश की जा रही है।

इन बिंदुओं पर टिकी है जांच की सुई:
1 अप्रैल 2021 से अब तक कितनी बार और कितनी राशि एडवांस के तौर पर निकाली गई?
निकाली गई राशि के बदले में कितने वैध बिल प्रस्तुत किए गए और कितनी राशि अभी भी अधिकारी के पास ‘बकाया’ है?
खेल सामग्री के चयन और खरीद के लिए क्या पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई या पसंदीदा वेंडरों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया?
प्रशासनिक साख पर सवाल
एक तरफ प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ अनूपपुर में एक जिला स्तरीय अधिकारी अपने ही वरिष्ठ अधिकारी के आदेश को नजरअंदाज कर रहा है। यदि वित्तीय प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं और कोई गबन नहीं हुआ है, तो अधिकारी जानकारी सार्वजनिक करने से क्यों बच रहे हैं?
इस गंभीर लापरवाही और आदेश की अवहेलना के मामले में अब जिला कलेक्टर के सीधे हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है, ताकि RTI कानून का सम्मान बना रहे और जनता के पैसे के कथित दुरुपयोग का सच सामने आ सके।