November 30, 2022 11:03 pm

माध्यमिक स्कूल चचाई के बच्चों की खुराक पर डाका डाल रहे समूह

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पानी की तरह बनती है सब्जी व दाल
अनूपपुर। शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने, बच्चों को स्वस्थ रखने व स्कूलों के प्रति बच्चों का रूझान बढाने के लिए सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे है, बच्चों को स्कूल मे लाने एवं स्वास्थ्य के प्रति रूचिकर योजना मध्यान्ह भोजन का संचालन किया जा रहा है, बच्चों के प्रति यह योजना अहम भूमिका रखती है। माध्यमिक स्कूल चचाई में बच्चों की प्रतिदिन शत् प्रतिषत उपस्थिति हो जिसके लिये मिड डे मील का संचालन साक्षी स्वसहायता समूह के माध्यम से कराया जा रहा है। लेकिन बच्चों को पौष्टिक भोजन न देते हुए समूह के द्वारा निम्न स्तर का भोजन परोसा जा रहा है। हालत यह है कि बच्चों को पानी से भरी सब्जी एवं दाल व कीडे युक्त चावल परोसा जाता है। शिक्षकों एवं बच्चों ने जानकारी देते हुए बताया कि स्व सहायता समूह के द्वारा निरंतर आलू की सब्जी एवं चावल दिया जा रहा है कई माह में एकाद बार दाल बनी भी तो पानी मंे दाल बच्चों को धंूधनी पडती है।
षिकायत है बेअसर नही होती कार्यवाही
बच्चों ने शिकायत करते हुए बताया कि साक्षी स्व सहायता समूह के द्वारा बहुत ही घटिया खाना परोसा जा रहा है सब्जी की गुणवत्ता बद से बदतर है सब्जी के नाम पर पानी की तरी परोसी जाती है आलू की मात्रा नाम मात्र के लिए ही रहती है। वही कुछ दिन पहले बिना बघरी सब्जी बच्चों को दी गई थी बच्चे भी मजबूरी मे भोजन करते है। शिक्षक ने बताया कि समूह को इस बारे मे कई बार बोला गया परन्तु समूह के द्वारा कोई सुधार नही किया गया। जन शिक्षक एवं अधिकारीयों को इसके बारे मे कई बार मौखिक रूप से शिकायत भी की गई परन्तु कोई भी कार्यवाही नही हुई।
बिना मसाले कैसे बने स्वादिष्ट सब्जी
माध्यमिक स्कूल चचाई का जहां भोजन बनता है वहां गुरूवार को मौके पर उपस्थित रसोईया से जब जानकारी ली गई तो उन्होने भी साक्षी स्व सहायता समूह की मनमानी एवं राषन उपलब्ध न कराने की बात कही। जानकारी देते हुए बताया की समूह के अध्यक्ष के द्वारा सब्जी नही दी जाती है। प्रतिदिन मात्र 1 किलो 500 ग्राम आलू दिया जाता है जिसमे सब्जी बनाने को कहा जाता है न मसाला दिया जाता है और न ही प्याज, टमाटर, लेहसुन ऐसे मे सब्जी बच्चों को पुजाने के लिए ज्यादा पानी डालना पडता है। मसाला भी पर्याप्त नही होने से सब्जी अच्छी नही बनती है।
योजना को लगा रहे पलीता
स्कूल में साक्षी स्व सहायता समूहो की नाराजगी शायद इस बात को लेकर है की मीनू के आधार पर भोजन देने पर उन्हे घर से पैसा लगाना पड जायेगा। शासन के द्वारा कम पैसा दिया जा रहा है परन्तु मीनू को छोड दिया जाये तो समूह की यह जिम्मेदारी तो बनती है कि बच्चों को समूह द्वारा जो भी भोजन दिया जाये वह गुणवत्ता पूर्ण एवं स्वादिष्ट हो जिससे बच्चे खाना पसंद करे एवं उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर न पडे परन्तु इसके विपरीत साक्षी स्व सहायता समूह के द्वारा गुणवत्ता हीन भोजन परोस कर बच्चो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड कर योजना का पलीता लगाया जा रहा है।

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