राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर दिखी घोर लापरवाही
अनूपपुर। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर अनूपपुर जिला मुख्यालय में जनजाति कार्य विभाग की लापरवाही और उदासीनता साफ देखने को मिली है जहां इस आयोजन में लगभग 300 से 400 साइकिल सवार बच्चे रैली में शामिल होने थे लेकिन विभाग के कुछ उदासीन पदाधिकारी की वजह से इस रैली में महज 30 से 40 साइकिल ही शामिल हो पाए ऐसे में यह रैली साफ दर्शा रही है कि विभाग की स्थिति क्या है और विभाग खेल को किस स्तर तक किस दिशा में लेकर जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ खेल प्रमुख जो अपने निजी स्वार्थ के लिए लगातार तरह-तरह के आयोजन अपने क्षेत्र स्तर पर करते रहते हैं लेकिन वास्तविक रूप से आदिवासी और पिछड़े इलाकों के आदिवासी बच्चों को आज तक उन्होंने नहीं पहचाना और ना ही उन्हें उठाने का प्रयास किया है। कुछ छात्रों ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि उन्हें कभी भी यह तक नहीं बताया गया कि हमें आगे क्या करना है और हमें खेल में किस तरह से आगे बढ़ना चाहिए।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित साइकिल रैली जिले भर के विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी समेत समस्त विद्यालयों से छात्राओं को शामिल होना था लेकिन उक्त रैली में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक और जिला के खेल अधिकारियों के अलावा विद्यार्थियों की संख्या खानापूर्ति महज साइकिल रैली औपचारिकता में सिमट कर रह गई। ऐसा लगता है कि किसी भी आयोजन के पूर्व विभाग के द्वारा या जिन्हें जवाबदारी सौपी जाती है उनके द्वारा पूर्णता प्रचार प्रसार नहीं किया जाता यही कारण है कि ऐसे महत्वपूर्ण कार्यों पर भी औपचारिकता और कार्यों की खानापूर्ति तक सीमित रह कर कार्यों को पूर्ण कर लिया जाता है। जबकि जिले में सभी विभागों के अधिकारी, कर्मचारी सहित समाज सेवी, पत्रकार बंधुओ सहित कई निजी विद्यालय के साथ शासकीय कालेज भी है। लेकिन ऐसा लगा कि जिन्हें जवाबदारी सौपी गई थी वो शीघ्रता से ये कार्य निपटाना चाहते थे और वाहवाही लूटना चाह रहे थे।
क्या खेल पदाधिकारी को बदलने की आवश्यकता
साइकिल रैली में शामिल ना हो पाने वाले कुछ बुद्धिजीवियों ने कहा कि यह एक बड़ी लापरवाही है और जनजातिकार विभाग में खेल प्रमुख क्यों उदासीनता का नतीजा है कि राष्ट्रीय खेल दिवस जैसे बड़े अवसर पर भी खेल को महत्व न मिलाना और लोगों तक इसकी जानकारी ना पहुंच पाना यह बहुत बड़ी बात है ऐसे में क्या खेल पदाधिकारी को बदलना जरूरी है? कुछ लोगों का कहना है किस जिले में और भी बहुत खेल प्रशिक्षक और अनुभवी खेल प्रभारी हैं जिन्हें यह जिम्मा दिया जा सकता है और उदासीन और लापरवाह पदाधिकारी अधिकारी को पद से हटकर जिले में खेल के स्तर को आगे बढ़ाया जा सकता है।
आखिर क्यों मिल रहा है अभयदान
जनजातिया कार्य विभाग में पदस्थ खेल अधिकारी के क्रियाकलाप और उनकी मनमानी के साथ उदासीनता को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि उन्हें लगातार अभय दान दिया जा रहा है निश्चित तौर पर उनके पीछे या उनके ऊपर किसी बड़े अधिकारी या नेता का हाथ है जिस कारण से लगातार लापरवाही करने के बाद भी उन्हें लगातार पद में रखा गया है ऐसे में भला जिले में खेल का स्तर कहां जाएगा और छात्रों का भविष्य क्या होगा यह एक सोचनीय विषय है।








