पति की दीर्घायु हेतु महिलाए की वट वृक्ष की पूजन,आराधना

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नर्मदा उद्गम स्थल क्षेत्र में भारी संख्या में स्त्रियां की वट पूजन ।
अमरकंटक / श्रवण उपाध्याय। मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक क्षेत्र में आज ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को दिन गुरुवार ०६-०६-२०२४ तारीख में महिलाए सावित्री व्रत रहकर वट वृक्ष की पूजन , आराधना कर बारह परिक्रमा लगाईं । इस पूजन से पति की दीघार्यु में वृद्धि होती है येसी भावना को संजोए महिलाए यह व्रत करने को महत्व देती है । इस व्रत में वट वृक्ष की परिक्रमा करती है कच्चा धागा बांधती है । पंडित सुनील दुबे कहते है की वट वृक्ष (बरगद पेड़) में देव निवास करते है । बरगद के पेड़ में जगत के पालनहार भगवान विष्णु , शिव और ब्रम्हा का वास होता है जिसकी पूजा आराधना करने से सौभाग्य , आरोग्य व सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है । वट वृक्ष में त्रिदेव का वास होता है इसलिए इसमें जल भी चढ़ाया जाता है । शास्त्रों में बताया है की वट सावित्री व्रत में १०८ परिक्रमा लगानी चाहिए ।
अमरकंटक क्षेत्र व आसपास की सुहागिन महिलाएं ही अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए व्रत रख पूजन , आराधना और वट वृक्ष की परिक्रमा लगाईं जिससे परिवार के लोगो को सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है तथा वैवाहिक जीवन में खुशियां आती है । देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान को वट वृक्ष नीचे छांव में रख यमराज से अपने पति का जीवन पाया था , इस दिन से ही पूजन विधान प्रारंभ हुआ । बरगद पेड़ के तनों में भगवान विष्णु , जड़ों में भगवान ब्रह्मा और शाखाओं में भगवान शिव का वास रहता है । वृक्ष की कई शाखाएं नीचे की ओर झुकी रहती है जिन्हे देवी सावित्री का रूप माना जाता है । इन्ही सब मान्यताओं के आधार पर हिंदू सुहागिन महिलाए यह व्रत करके अपने सुहाग की रक्षा हेतु व्रत रख पूजन , आराधना करतीं है । इसी पूजन को नगर की कुछ महिलाए नर्मदा नदी तट किनारे वट वृक्ष की विधि विधान पूर्वक पूजन , आराधना और परिक्रमा करती नजर आईं ।

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