कार्यक्रमों का कचरा और मृत पशु खुले में फेंके जाने से बढ़ा कुत्तों का जमावड़ा, दोपहिया वाहन चालकों को दौड़ाकर काटने का प्रयास; ग्रामीण बोले—समय रहते नहीं जागा प्रशासन तो हो सकता है बड़ा हादसा
देपालपुर। संदीप सेन। देपालपुर-बेटमा मुख्य मार्ग पर स्थित रंगवासा गांव की आर्मी बीड़ के आसपास इन दिनों आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक ने ग्रामीणों और राहगीरों की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि दिन हो या रात, बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों के झुंड सड़क के आसपास मंडराते रहते हैं और दोपहिया वाहन चालकों को दौड़ाकर पकड़ने का प्रयास करते हैं। कई बार वाहन चालक कुत्तों से बचने के प्रयास में अपना संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार होने की स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, रंगवासा बीड़ के आसपास लंबे समय से खुले में कचरा फेंकने की समस्या बनी हुई है। आसपास के कुछ ग्रामीण कार्यक्रमों के बाद बची पत्तल, भोजन सामग्री और अन्य कचरा यहां लाकर फेंक देते हैं। इसके अलावा मृत पशुओं को भी खुले में फेंके जाने की बात सामने आ रही है। इसी वजह से कुत्तों का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति अब महज गंदगी तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह सीधे तौर पर सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन गई है।
मजदूरों की आवाजाही ज्यादा, इसलिए खतरा और गंभीर
देपालपुर-बेटमा मार्ग औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर से जुड़ा महत्वपूर्ण मार्ग है। इंगोरिया, गौतमपुरा, देपालपुर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में मजदूर प्रतिदिन रोजगार के लिए पीथमपुर की ओर आवागमन करते हैं। इनमें बड़ी संख्या दोपहिया वाहन चालकों की होती है। ऐसे में सड़क पर अचानक कुत्तों का झुंड आ जाना या वाहन चालक के पीछे दौड़ना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। खासकर सुबह और रात के समय मजदूरी के लिए आने-जाने वाले लोगों के सामने जोखिम और बढ़ जाता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यदि कोई गरीब मजदूर या उसका परिवार इस तरह की दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो जाता है तो उसके इलाज का खर्च कौन उठाएगा? जिस परिवार का कमाने वाला सदस्य घायल हो जाए, उसके सामने इलाज के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण का संकट भी खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को दुर्घटना होने के बाद देखने के बजाय प्रशासन को दुर्घटना से पहले ही आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
‘जिम्मेदारों के जागने का इंतजार या हादसे का?’
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर खुले में कचरा और मृत पशु फेंकने वालों पर कार्रवाई कब होगी? यदि समय रहते बीड़ क्षेत्र की सफाई, मृत पशुओं के उचित निस्तारण और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान की व्यवस्था नहीं की गई तो किसी दिन गंभीर दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला केवल स्वच्छता का नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी और सड़क सुरक्षा का विषय है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करे।
सचिव ने कहा—अधिकारियों को पत्र लिखेंगे
ग्राम पंचायत रंगवासा के सचिव मोहनसिंह मकवाना ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही विधायक, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम, तहसीलदार एवं जनपद सीईओ को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा। साथ ही समस्या के निराकरण के लिए कार्रवाई एवं मार्गदर्शन मांगा जाएगा।
एसडीएम ने तत्काल लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए देपालपुर एसडीएम चरणजीत सिंह हुड्डा ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने देपालपुर जनपद के खंड पंचायत अधिकारी अजय जायसवाल को मामले में शीघ्र कार्रवाई करने तथा कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासनिक स्तर पर मिले निर्देश के बाद रंगवासा बीड़ के आसपास सफाई, मृत पशुओं के निस्तारण और आवारा कुत्तों के आतंक से ग्रामीणों एवं राहगीरों को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ आज की परेशानी का नहीं है—सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन कब जागेगा?
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