शिवपुरी। रंजीत गुप्ता। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के ग्वालियर-चंबल संभागीय कार्यालय में भ्रष्टाचार और वित्तीय धांधली का बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के जिलाध्यक्ष और शिवपुरी जिले के आरटीआई कार्यकर्ता माखन सिंह धाकड़ ने 21 सितंबर 2026 को लोकायुक्त भोपाल, वल्लभ भवन और नगरीय प्रशासन आयुक्त के समक्ष 54 पन्नों का शिकायती शपथपत्र सौंपा है।
शिकायत का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि जिस अधिकारी को नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने 7 सितंबर 2026 को आदेश क्रमांक 26637 के तहत निलंबित किया था, उसके बाद भी 57 निकायों में अरबों के अवैध भुगतान बैकडेट में जारी रहने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता, सहायक संचालक रीता कैलाशिया, प्रभारी लेखापाल सुनील लचौरिया और लिपिक सौरभ सिंह कौरव को कटघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि गुप्ता मूल रूप से सीएमओ ‘ख’ श्रेणी के अधिकारी हैं, लेकिन ट्रांसफर नीति 2025-26 का उल्लंघन कर 16 जून 2026 को प्रभारी संयुक्त संचालक बन गए। सीहोर, नर्मदापुरम और मुरैना के वित्तीय अनियमितता के 3 मामलों की जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें प्रभार दिया गया।
आरोपों के अनुसार गुप्ता ने 26 नवंबर 2025 से 15 जून 2026 तक बिना विधिवत प्रभार के अवैध रूप से DDO पावर का उपयोग किया और चेकर आईडी के लिए नियुक्त सहायक लेखाधिकारी पूजा महकाली को चार्ज न देकर पसंदीदा कर्मचारियों के जरिए बिना टेंडर जांच के भुगतान कराए। बिलों से GST और आयकर की कटौती भी नहीं की गई।
शपथपत्र में नियुक्तियों में भी फर्जीवाड़े के आरोप हैं। नगर परिषद फूप में SC आरक्षित पद पर नितेश भारद्वाज को और दतिया के मृतक कर्मचारी के पुत्र अंश ठाकुर को क्षेत्राधिकार से बाहर इंदरगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति दी गई। गौरमी में 31 जुलाई को रिटायर हुए उपयंत्री सुरेंद्र श्रीवास्तव को 10 दिन बाद ही 1 सितंबर को संविदा पर रख लिया गया।
इसके अलावा सबलगढ़ और चाचौड़ा में आरक्षित पदों पर सामान्य वर्ग को प्रमोशन, गुना में स्वीकृत पदों से बाहर जाकर पदोन्नति और भितरवार में बिना टेंडर पुराना भवन डिस्मेंटल कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
शिवपुरी नगर पालिका से जुड़ा मामला सबसे गंभीर बताया गया है। 29 दिसंबर 1991 को 89 दिन के लिए तदर्थ लिपिक के रूप में नियुक्त राघवेंद्र श्रीवास्तव को नियम विरुद्ध DPC कर नियमित लेखापाल बनाने की अनुशंसा शासन को भेजने का आरोप है।
बता दें कि गुप्ता को नगर पालिका भिंड में निर्माण कार्यों में अनियमित भुगतान की जांच रिपोर्ट 5 महीने तक न सौंपने, 6 विभागीय जांच, 15 लोकायुक्त केस और हाईकोर्ट अवमानना मामलों में प्रतिवेदन लंबित रखने पर निलंबित किया गया था। आरोप है कि निलंबन की भनक लगते ही गुना में बैठक के दौरान ही बैकडेट में आदेश जारी कर दिए गए।
शिकायतकर्ता ने 57 निकायों के भुगतानों का बिल-बाय-बिल परीक्षण और SNA स्पर्श पोर्टल का फॉरेंसिक ऑडिट कर SIT जांच की मांग की है।








