सिंध जलावर्धन योजना की पुरानी पाइपलाइन बनी पर्यावरण के लिए खतरा
– टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर को आदेश पालन सुनिश्चित करने के निर्देश
शिवपुरी। रंजीत गुप्ता। माधव टाइगर रिजर्व सहित आसपास के वन क्षेत्रों, सड़क किनारे और कृषि भूमि में बड़ी मात्रा में पड़े Glass Reinforced Plastic (GRP) पाइपों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), भोपाल ने सख्त रुख अपनाया है। NGT ने शिवपुरी नगर पालिका को 30 दिनों के भीतर पाइपों को हटाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
यह महत्वपूर्ण आदेश Original Application No. 207/2026 (CZ), Aditya Shrivastava v. State of Madhya Pradesh & Ors. में 25 सितंबर 2026 को पारित किया गया, जिसमें अभय जैन एवं राशिका नारायण (AOR, सुप्रीम कोर्ट) द्वारा पैरवी की गई।
मामला वर्ष 2023 में सिंध जलावर्धन योजना के तहत मड़ीखेड़ा बांध से शिवपुरी नगरपालिका क्षेत्र के बीच बिछाई गई जलापूर्ति पाइपलाइन को बदले जाने के बाद सामने आया। पाइपलाइन बदलने के बाद बड़ी मात्रा में पुराने GRP पाइप और संबंधित सामग्री को वहीं छोड़ दिया गया। उनका उचित प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया। यह स्थिति केवल सड़क किनारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि वन क्षेत्रों, कृषि भूमि और विशेष रूप से माधव टाइगर रिजर्व की सीमा के भीतर भी GRP पाइप पड़े पाए गए। संरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह बड़ी मात्रा में कचरा पड़ा रहना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया।
GRP यानी Glass Reinforced Plastic एक ऐसा पदार्थ है जिसमें प्लास्टिक और ग्लास फाइबर का इस्तेमाल होता है। यह सामान्य कचरे की तरह आसानी से खत्म नहीं होता। लंबे समय तक खुले में पड़े रहने पर इसके छोटे-छोटे कण मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित कर सकते हैं। टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में GRP पाइपों का पड़ा रहना केवल कचरे की समस्या नहीं, बल्कि वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा है।
इसी को लेकर आवेदक ने NGT में मांग की थी कि सड़क किनारे और जंगल में पड़े GRP पाइपों को जल्द हटाया जाए। इस पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने शिवपुरी नगर पालिका को 30 दिनों के भीतर सभी GRP पाइप और अन्य कचरा सामग्री हटाने के निर्देश दिए। साथ ही माधव टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है।








