
वर्षा ऋतु की वन्य उपज जंगल से थाली तक बनी लोगों की पसंद, सीमित अवधि में मिलती है “पिहरी”
अमरकण्टक। श्रवण कुमार उपाध्याय।
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक के बाजार में इन दिनों वर्षा ऋतु में जंगलों से मिलने वाली जंगली मशरूम ‘भोंडो पिहरी’ की खूब मांग बनी हुई है । प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाली यह मौसमी वन्य उपज अपने विशेष स्वाद और चिकनाहट के कारण स्थानीय लोगों के साथ ही अन्य क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी आकर्षित कर रही है ।
बाजार में इन दिनों पिहरी की कीमत करीब 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक है । वहीं छोटे पैमाने पर खरीदने वाले ग्राहकों को यह लगभग 100 रुपये पाव के भाव से भी उपलब्ध कराई जा रही है । छत्तीसगढ़ के केवची निवासी नरेश यादव , परसराम यादव और दिलीप यादव ने बताया कि ग्रामीण लोग जंगलों से पिहरी एकत्र करके अमरकंटक या आसपास के बाजार में बिक्री के लिए लाते हैं ।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्षा ऋतु में सीमित अवधि के दौरान ही इसकी उपलब्धता रहती है । इस वर्ष भी बाजार में इसकी आवक लगभग 15 दिन और रहने की संभावना बताई जा रही है । जब वर्षाकाल में बादल जोरो से गरजता है तब इसकी आवक ज्यादा होती है ।
सब्जी के साथ चटनी भी पसंद
भोंडो पिहरी की सब्जी बनाने के साथ इसकी चटनी भी बनाई जाती है , जिसे लोग काफी पसंद करते हैं । ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में जंगलों से मिलने वाली यह प्राकृतिक उपज करीब एक सीमित अवधि तक ही उपलब्ध होती है । इसी वजह से इसके बाजार में आते ही इसकी मांग बढ़ जाती है ।
जंगल से थाली तक का यह सफर पूरी तरह मौसमी है
सीमित समय के लिए मिलने वाली पिहरी या भोंडो पिहरी अमरकंटक के बाजार में इन दिनों स्थानीय वन्य उपज और पहाड़ी क्षेत्र के पारंपरिक स्वाद की पहचान बनी हुई है ।







